Amar Naik Story: अमर नाइक की पूरी कहानी! सब्जी विक्रेता से मुंबई अंडरवर्ल्ड का ‘रावण’ बनने तक
दादर की सब्जी मंडी से शुरू हुआ सफर कैसे मुंबई अंडरवर्ल्ड तक पहुंचा? दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली से टकराव और 1995 के एनकाउंटर की पूरी कहानी।
Amar Naik Story: मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में कई ऐसे नाम रहे हैं, जिनकी कहानियां आज भी अपराध की दुनिया के सबसे खौफनाक अध्यायों में गिनी जाती हैं। इन्हीं नामों में एक नाम अमर नाइक का था, जिसे मुंबई अंडरवर्ल्ड में ‘रावण’ के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि उसके नाम का खौफ इतना था कि दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली जैसे बड़े गैंगस्टर भी उससे सीधी टक्कर लेने से बचते थे। लेकिन अमर नाइक का सफर किसी आलीशान जिंदगी से नहीं, बल्कि दादर की सब्जी मंडी से शुरू हुआ था।
80 के दशक में दादर की सब्जी मंडी मुंबई के बड़े कारोबारी केंद्रों में शामिल थी। इसी मंडी में अमर नाइक के भाई अजित की सब्जी की दुकान थी। परिवार चाहता था कि अमर अपने भाई का हाथ बंटाए, क्योंकि उसका स्वभाव बेहद गुस्सैल और लड़ाकू बताया जाता था। शुरुआत में अमर ने भाई के साथ सब्जी बेचने का काम किया, लेकिन इसी मंडी में हुई एक घटना ने उसकी जिंदगी की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
उस समय दादर सब्जी मंडी में पोटिया गैंग का दबदबा था। गैंग के लोग कारोबारियों से हफ्ता वसूलते थे। एक दिन जब पोटिया गैंग के सदस्य अमर के भाई अजित की दुकान पर पहुंचे और हफ्ता मांगने लगे, तो अमर ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद विवाद बढ़ता चला गया। बताया जाता है कि एक दिन पोटिया गैंग के पांच लोगों ने अजित की पिटाई शुरू कर दी और अमर का पता पूछने लगे। जब इसकी जानकारी अमर को हुई तो वह सीधे उनके सामने पहुंच गया।
मुठभेड़ में पोटिया गैंग के तीन लोग घायल हो गए, जबकि दो मौके से भाग निकले। इस घटना के बाद दादर मंडी में अमर का दबदबा बढ़ने लगा। पोटिया गैंग को यह अपनी बेइज्जती लगी और उसने अमर को सबक सिखाने के लिए उसके छोटे भाई अश्विन का अपहरण कर लिया। गैंग की मांग थी कि अमर उनके सामने आए। लेकिन अश्विन मौका देखकर वहां से भाग निकला। इसके बाद अमर ने समझ लिया कि मुंबई की इस दुनिया में टिके रहने के लिए पोटिया गैंग को खत्म करना जरूरी है। यहीं से उसका अपराध की दुनिया में तेजी से विस्तार शुरू हुआ।
धीरे-धीरे अमर नाइक का प्रभाव मध्य मुंबई के इलाकों में बढ़ने लगा। इसी दौरान मुंबई अंडरवर्ल्ड में दाऊद इब्राहिम और अरुण गवली के बीच भी वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। दाऊद विदेश जा चुका था और मुंबई में अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए उसके भरोसेमंद लोगों में छोटा राजन भी सक्रिय था। लेकिन अमर नाइक को नियंत्रित करना आसान नहीं था। उसकी गतिविधियां मुंबई से बाहर तक फैली थीं और उसके बारे में पुलिस के पास भी ज्यादा ठोस जानकारी नहीं थी।
अमर नाइक की पहचान को लेकर कई किस्से भी मशहूर हुए। कहा जाता है कि उसके पास अलग-अलग नामों से कई पासपोर्ट थे और वह विदेश आता-जाता रहता था। यहां तक दावा किया जाता है कि पुलिसकर्मी कभी उसके सामने से गुजरे और सामान्य बातचीत भी हुई, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि सामने खड़ा व्यक्ति वही अमर नाइक है जिसकी पुलिस को तलाश थी।
इस बीच अमर के परिवार पर भी खतरा बढ़ने लगा। उसका भाई अजित राजनीति में सक्रिय हुआ और शिवसेना से जुड़ गया, जबकि छोटा भाई अश्विन शुरुआत में अपराध की दुनिया से दूर था। लेकिन एक दिन बेंगलुरु से मुंबई लौटते वक्त हाईवे पर उसकी कार पर हमला हुआ। गोलियों की बौछार के बावजूद अश्विन और उसकी पत्नी बच गए। इस घटना ने परिवार को अंदर तक हिला दिया। इसके बाद अश्विन भी धीरे-धीरे अमर नाइक के गैंग में शामिल हो गया।
अमर नाइक के गिरोह में ऐसे युवाओं की संख्या भी बढ़ती गई, जिनका जीवन मुंबई की बंद होती कपड़ा मिलों और बेरोजगारी से प्रभावित हुआ था। अमर ने इन्हीं युवाओं को अपने साथ जोड़ा और धीरे-धीरे उसका गैंग मजबूत होता गया। उस दौर में रंगदारी, जबरन वसूली और हत्या जैसी वारदातों ने मुंबई के कारोबारियों और आम लोगों में डर पैदा कर दिया।
अमर नाइक का सबसे बड़ा टकराव अरुण गवली से हुआ। दोनों का प्रभाव मध्य मुंबई के आसपास के इलाकों में था। एक ही इलाके में दो गैंगस्टरों का दबदबा लंबे समय तक कायम रहना मुश्किल था। इसके बाद दोनों गिरोहों के बीच खूनी गैंगवार शुरू हो गई। दोनों तरफ से कई लोग मारे गए और मुंबई अंडरवर्ल्ड की लड़ाई और ज्यादा हिंसक होती चली गई। अमर नाइक पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और जबरन वसूली समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। खटाव मिल के मालिक सुनीत खटाव की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।
लगातार बढ़ते गैंगवार और अपराध ने पुलिस का दबाव भी बढ़ा दिया। पुलिस ने अमर के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उसके करीबियों और परिवार के सदस्यों पर नजर रखनी शुरू की। उसके गैंग के कई सदस्य पुलिस कार्रवाई में मारे गए या गिरफ्तार कर लिए गए। दूसरी ओर अरुण गवली को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। धीरे-धीरे मुंबई के अंडरवर्ल्ड में अमर नाइक की पकड़ कमजोर होने लगी।
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आखिरकार 1995 में पुलिस ने अमर नाइक को घेरने की योजना बनाई। मदनपुरा इलाके में पुलिस ने उसे घेर लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व उस दौर के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर ने किया। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के दौरान अमर नाइक ने फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। इसी के साथ मुंबई अंडरवर्ल्ड में ‘रावण’ के नाम से पहचाने जाने वाले अमर नाइक का अध्याय खत्म हो गया।
एक सब्जी विक्रेता से मुंबई के कुख्यात गैंगस्टर तक का अमर नाइक का सफर अपराध की उस दुनिया की तस्वीर पेश करता है, जिसमें स्थानीय विवाद धीरे-धीरे गैंगवार और फिर बड़े अंडरवर्ल्ड नेटवर्क में बदल जाते थे। अमर नाइक की मौत के बाद भी मुंबई अंडरवर्ल्ड की कहानी खत्म नहीं हुई, लेकिन उसका नाम उस दौर के उन कुख्यात गैंगस्टरों में दर्ज हो गया, जिनके बीच वर्चस्व की लड़ाई ने मुंबई की अपराध की दुनिया को लंबे समय तक प्रभावित किया।



