Shahzad Bhatti Network: 14 राज्यों में 200+ गिरफ्तार, ISI कनेक्शन का खुलासा; IED-ग्रेनेड बरामद

अमित शाह ने बताया आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा एजेंसियों ने कई राज्यों में एक साथ चलाया अभियान

Shahzad Bhatti Network: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देश के 14 राज्यों में व्यापक अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान के दौरान आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कैमरे समेत कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। सरकार ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया है।

अमित शाह ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया है और उसके जरिए भारत में विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने की कथित योजनाओं को नाकाम किया गया है। गृह मंत्री के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के चलते नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाई गई और बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई।

जांच एजेंसियों के सामने आए इनपुट के मुताबिक, कथित नेटवर्क का इस्तेमाल युवाओं की भर्ती, ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने, रेकी, लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने और हथियारों की व्यवस्था जैसे कामों के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा स्लीपर सेल तैयार करने और देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों के लिए जरूरी संसाधन जुटाने की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि नेटवर्क का दायरा एक राज्य तक सीमित नहीं था और इसके संपर्क देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए थे।

असम में हुई कार्रवाई से भी इस कथित नेटवर्क के व्यापक संपर्कों का पता चला। 25 जुलाई को असम पुलिस ने बताया था कि स्पेशल टास्क फोर्स ने धुबरी, चिरांग और बारपेटा पुलिस के साथ मिलकर तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, इन लोगों के पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी। खुफिया सूचना के आधार पर 24 जुलाई को कार्रवाई की गई थी।

असम में गिरफ्तार किए गए लोगों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, डेबिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए थे। पुलिस ने इन सामानों को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया था। जांच अधिकारियों को शक था कि डिजिटल माध्यमों और फर्जी पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल नेटवर्क की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।

असम पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रणब कुमार पेगू ने उस समय बताया था कि जांच में नेटवर्क के कई पहलुओं की जानकारी सामने आई है। इनमें भर्ती, ऑनलाइन कट्टरपंथ, रेकी, लॉजिस्टिक्स, जासूसी और अवैध तरीके से हथियार हासिल करने जैसी गतिविधियां शामिल होने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी था कि क्या इस नेटवर्क ने देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर सेल तैयार किए थे।

जांच में कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई थी। अधिकारियों का आरोप था कि नेटवर्क पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में था और उन्हें निर्देश मिलते थे। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका क्या थी और उनके बीच किस तरह का संपर्क स्थापित था।

जांच एजेंसियों ने कथित नेटवर्क के कुछ फ्रंट संगठनों से संबंधों की भी जांच की है। इनमें खालिस्तान आर्म्ड फोर्स, पंजाब सॉवरेनिटी अलायंस, खालिस्तान लिबरेशन आर्मी, शेर-ए-पंजाब ब्रिगेड, यूनाइटेड सिख ब्रदरहुड, सिख टाइगर्स ऑफ खालिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान जैसे नाम सामने आए हैं। हालांकि, इन संगठनों से जुड़े दावों और गिरफ्तार लोगों की वास्तविक भूमिका की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगी।

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14 राज्यों में हुई कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि आतंकवादी नेटवर्क अक्सर अलग-अलग राज्यों में छोटे मॉड्यूल बनाकर काम करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में किसी एक स्थान पर कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का पता लगाना आसान नहीं होता। विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान से ऐसे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलती है।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट किया कि सरकार आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कड़ा रुख जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ और बरामद सामान की फॉरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क की पूरी संरचना और इसके कथित विदेशी संपर्कों का पता लगाने में जुटी हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में जांच जारी है। 200 से अधिक गिरफ्तारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी, उन्हें किस स्तर पर निर्देश मिलते थे और देश में संभावित हमलों के लिए किस तरह की तैयारी की जा रही थी। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।

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