Akhilesh Yadav: निलंबन नहीं मांगेंगे, बस कुछ दिन की बात है…’, मूंछों पर ताव देने वाले मैनपुरी CO पर अखिलेश यादव का तीखा तंज
पोस्टमार्टम हाउस पर हुए हंगामे के बीच सीओ सिटी अशोक सिंह के 'वीडियो बनाओ, अखिलेश को भेज दो' वाले अंदाज ने खड़ा किया सियासी बवाल, सीओ ने भी दी सफाई
Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, और इसी वीडियो ने अब सूबे की सियासत में हलचल मचा दी है। मामला एलाऊ थाना क्षेत्र का है, जहां एक ट्रक हेल्पर की हत्या के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर जमकर हंगामा हुआ था। इस हंगामे के दौरान सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह का जो अंदाज कैमरे में कैद हुआ, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर तीखा पलटवार किया है।
आखिर वीडियो में हुआ क्या था
घटना 30 अगस्त की शाम की है, जब एलाऊ थाना क्षेत्र में एक हेल्पर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि ट्रक चला रहा ड्राइवर घायल हो गया था। इस वारदात के बाद परिजन और गांव वाले न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए और पोस्टमार्टम हाउस पर प्रदर्शन करने लगे।
इसी तनावभरे माहौल में सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह की भीड़ में मौजूद कुछ लोगों से तीखी नोकझोंक हो गई। इसी दौरान एक युवक मोबाइल कैमरा ऑन करके सीओ की वीडियो बनाने लगा और धमकी भरे लहजे में बोला कि वह यह पूरा मामला ‘अखिलेश भैया’ तक पहुंचाएगा। इस पर सीओ सिटी का जवाब कुछ ऐसा था जिसने उन्हें विवादों में घेर दिया — उन्होंने मूंछों पर ताव देते हुए कहा कि खूब वीडियो बनाओ, वायरल भी करो और अखिलेश यादव को भेजना भी मत भूलना।
बस यही अंदाज अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया और मामला सीधे यूपी की सियासत तक जा पहुंचा।
अखिलेश यादव ने कसा तंज
जैसे ही यह वीडियो अखिलेश यादव तक पहुंचा, सपा प्रमुख ने इसे हल्के में लेने के बजाय सीधा निशाना साधा। उन्होंने अपने एक्स हैंडल से वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जिसके सिर पर सत्ता और जातीय समीकरण का हाथ हो, उसकी मूंछों पर ताव आना कोई बड़ी बात नहीं। ऐसे अफसरों से इंसाफ की उम्मीद रखना ही बेमानी है।
लेकिन अखिलेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे लिखा कि यह रौब-रुतबा बस कुछ ही दिनों का मेहमान है, क्योंकि बदलाव अब दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। और सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने साफ कह दिया — ‘हम निलंबन की मांग नहीं करेंगे।’
निलंबन न मांगने के पीछे छिपा इशारा
अब सवाल यह उठता है कि आखिर अखिलेश यादव निलंबन की मांग क्यों नहीं करना चाहते, जबकि विवाद इतना बड़ा हो गया है। दरअसल उनके बयान को गौर से पढ़ें तो यह महज एक सामान्य टिप्पणी नहीं बल्कि सीधा राजनीतिक इशारा नजर आता है।
अखिलेश यहां 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तरफ इशारा कर रहे हैं। उनका मतलब साफ है कि सत्ता परिवर्तन होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा, और जब सरकार बदलेगी तो अफसरशाही के समीकरण भी अपने आप बदल जाएंगे। यानी वे निलंबन जैसी छोटी मांग में उलझने के बजाय सीधे बड़े बदलाव की बात कर रहे हैं। इसे तंज कम, चेतावनी ज्यादा माना जा रहा है।
सीओ अशोक सिंह ने दी अपनी सफाई
विवाद बढ़ता देख सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह भी सामने आए और उन्होंने पूरी घटना का अपना पक्ष रखा। उनके मुताबिक, हत्या की वारदात के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसी गांव के मोहित यादव नाम के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया था। घायल ड्राइवर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई थी और आरोपी की पहचान भी ड्राइवर ने ही की थी।
सीओ ने दावा किया कि असली वजह गांव की सियासत है। उनके अनुसार, गांव के दो प्रधानों के बीच पुरानी रंजिश चल रही है, और मौजूदा प्रधान ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि गोली किसी और शख्स कन्हैया यादव ने चलाई थी। सीओ का कहना है कि कन्हैया को जानबूझकर फर्जी आरोपों में फंसाने की कोशिश हो रही थी, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी रंजिश के चलते पहले घटनास्थल और थाने के पास हंगामा हुआ, और अगले दिन पोस्टमार्टम हाउस पर भी वैसा ही बवाल दोहराया गया। हालांकि पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी की पाबंदी बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से किया मना
‘बेवजह राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है’
सीओ अशोक कुमार सिंह ने वायरल वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर वीडियो को गौर से देखा जाए तो मौके की पूरी सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक तौर पर एक खास जाति से जोड़कर निशाना बनाने की कोशिश की गई, और यह भी कहा गया कि वीडियो सीधे नेता तक भेजा जाए।
इसी पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा था कि वीडियो किसी नेता को भेजने के बजाय उससे भी ऊपर भेजा जाए। सीओ ने साफ किया कि उनका रुख पूरी तरह निष्पक्ष रहा है और पुलिस ने जो भी कार्रवाई की, वह नियमों के दायरे में रहकर की है। उनका कहना है कि पुलिस पर बेवजह राजनीतिक दबाव डाला जा रहा है, जो सरासर गलत है।
अब आगे क्या
फिलहाल यह मामला सियासी रंग पकड़ चुका है। एक तरफ अखिलेश यादव इसे प्रशासनिक रवैये और सत्ता के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ सीओ इसे गांव की आपसी रंजिश और बेवजह के राजनीतिक दबाव का नतीजा बता रहे हैं। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक कदम उठाया जाता है या नहीं।



