International News: UN में मानचित्र सुधार प्रस्ताव पास, भारत ने किया समर्थन, अमेरिका बना अकेला विरोधी

193 सदस्यीय महासभा में 164 देशों ने किया समर्थन, अमेरिका ने अकेले डाला विरोध में वोट, भारत ने रखी संतुलित राय

International News: संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक ऐसा प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ है, जो दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को अधिक सटीक तरीके से दर्शाने का लक्ष्य रखता है। इस प्रस्ताव को भारत सहित अधिकांश सदस्य देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने इसका खुलकर विरोध किया।

प्रस्ताव को मिला भारी समर्थन

टोगो द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 193 सदस्यों वाली महासभा में से 164 देशों ने मतदान किया। छह देश मतदान से दूर रहे, जबकि केवल अमेरिका ने इसके विरोध में वोट डाला। इतने बड़े बहुमत के साथ पारित होना इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर बनी सहमति को दर्शाता है।

भारत का पक्ष: तकनीकी स्वतंत्रता जरूरी

भारतीय राजनयिक ने महासभा में भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समर्थन किसी एक विशेष मानचित्र प्रोजेक्शन प्रणाली को थोपने के लिए नहीं है। उनके अनुसार, अलग-अलग मानचित्र प्रोजेक्शन अलग-अलग उद्देश्यों — जैसे दिशा, दूरी या आकृति — को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं, इसलिए हर देश और संस्था को अपनी जरूरत के मुताबिक प्रोजेक्शन चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। भारत का जोर सिर्फ इतना है कि जहां असल मकसद भू-भाग के सापेक्ष आकार को सही दिखाना हो, वहां समान-क्षेत्रफल वाले तरीकों को प्रोत्साहन मिले।

क्यों उठा यह मुद्दा

प्रस्ताव में इस बात को रेखांकित किया गया कि 16वीं सदी में समुद्री नौवहन के लिए तैयार किया गया पारंपरिक मानचित्र प्रोजेक्शन आज भी स्कूलों, मीडिया और डिजिटल माध्यमों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि भूमध्य रेखा से दूर के इलाकों का आकार वास्तविकता से कहीं ज्यादा बड़ा दिखता है।

अफ्रीका और दक्षिण एशिया को लेकर चिंता

प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया कि मौजूदा प्रचलित नक्शे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों को लेकर एक भ्रामक और असंतुलित धारणा बनती है, जिसे सुधारने की जरूरत बताई गई।

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अमेरिका के विरोध की वजह अस्पष्ट

रिपोर्ट में अमेरिका के विरोध का ठोस कारण स्पष्ट नहीं किया गया, हालांकि यह अकेला देश रहा जिसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। वहीं एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

आगे क्या असर होगा

यह प्रस्ताव किसी देश को एक खास मानचित्र प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य नहीं करता, बल्कि अधिक सटीक और संतुलित मानचित्रण को प्रोत्साहित करता है। आने वाले समय में शिक्षण संस्थानों, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल होने वाले नक्शों में बदलाव की चर्चा तेज हो सकती है।

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