Supreme Court: छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी की प्रगति, गवाहों की सुरक्षा और जंतर-मंतर घटना से जुड़े मुद्दों पर पक्षों की दलीलें सुनीं। इस दौरान याचिकाकर्ता पक्ष और सॉलिसिटर जनरल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
कमेटी की कार्यवाही पर मांगी जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि हाई पावर्ड कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और उसकी अगली बैठक 15 सितंबर को होगी। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता पक्ष ने मांग की कि कमेटी की गतिविधियों और प्रगति की जानकारी अदालत तक नियमित रूप से पहुंचाने के लिए किसी नोडल अधिकारी या एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाए।
निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कमेटी के एक सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हर संस्था और व्यक्ति की नीयत पर संदेह करना उचित नहीं है। वहीं, जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया पर विचार करने के बाद ही हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है।
गवाहों की सुरक्षा पर कोर्ट की चिंता
मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी और कुछ अन्य गवाहों की सुरक्षा का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। एक वकील ने दावा किया कि 14 वर्षीय लड़की को धमकियां मिल रही हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्याय की मांग कर रहे किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही और संबंधित राज्यों से रिपोर्ट तलब करने के संकेत दिए।
मेट्रो स्टेशन बंद करने का मुद्दा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के समय कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे गैरकानूनी बताया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की आगे सुनवाई करने का फैसला किया। फिलहाल सभी की नजर कमेटी की अगली रिपोर्ट और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।
written by Siddhi Srivastava