Sports News: महिला एशिया कप जीतने के बाद नकवी से ट्रॉफी न लेने पर BCCI का बयान, बोले- ‘विवाद हमने शुरू नहीं किया’
BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि ट्रॉफी स्वीकार न करने का फैसला पहले से तय रुख के तहत लिया गया था। उन्होंने साफ किया कि टीम और बोर्ड के फैसले में कोई मतभेद नहीं है।
Sports News: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 72 रनों से हराकर महिला एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। भारत की महिला टीम ने रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप की ट्रॉफी जीती। हालांकि, खिताबी जीत के बाद पुरस्कार वितरण समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख मोहसिन नकवी से विजेता ट्रॉफी स्वीकार नहीं की। अब इस पूरे मामले पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने बोर्ड का पक्ष स्पष्ट किया है।
ट्रॉफी नहीं लेना मुद्दा नहीं, खिताब जीतना अहम
देवजीत सैकिया ने कहा कि ट्रॉफी किससे ली गई या नहीं ली गई, यह अलग विषय है। भारतीय टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात टूर्नामेंट जीतना थी। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने के फैसले के बाद विवाद जरूर पैदा हुआ, लेकिन इसकी शुरुआत BCCI की तरफ से नहीं हुई थी।
सैकिया के मुताबिक, पहलगाम की घटना के बाद BCCI ने अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया था। उनका कहना है कि महिला टीम ने वही नीति अपनाई, जो इससे पहले पुरुष टीम के एशिया कप के दौरान भी देखने को मिली थी। यानी बोर्ड अपने पहले से तय रुख पर कायम रहा।
पुरस्कार वितरण समारोह की व्यवस्था पर थी आपत्ति
BCCI सचिव ने कहा कि बोर्ड को पुरस्कार वितरण समारोह के तरीके पर आपत्ति थी। उन्होंने बताया कि BCCI की ओर से पहले ही संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी दे दी गई थी कि अगर समारोह उसी प्रस्तावित तरीके से आयोजित किया जाता है, तो भारतीय टीम उसमें शामिल नहीं होगी।
सैकिया के अनुसार, BCCI ने अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी थी, लेकिन आयोजन की व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद भारतीय टीम ने उस तरीके से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी बाद में हासिल की जाएगी।
‘यह पूरी तरह BCCI का फैसला था’
मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले को लेकर देवजीत सैकिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह BCCI का आधिकारिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बोर्ड के भीतर चर्चा हुई थी और सभी पक्षों के बीच इस मामले में एक समान रुख रहा।
सैकिया ने कहा कि खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन और BCCI अधिकारियों के बीच इस फैसले को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं है। उनके मुताबिक, सभी लोग एकजुट हैं और बोर्ड की स्थापित नीतियों के आधार पर फैसले लिए जाते हैं।
इस बयान से यह साफ करने की कोशिश की गई कि पुरस्कार समारोह में भारतीय खिलाड़ियों का रुख व्यक्तिगत फैसला नहीं था, बल्कि BCCI की पहले से तय रणनीति का हिस्सा था।
फाइनल में भारत ने दर्ज की बड़ी जीत
वहीं, टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले की बात करें तो भारतीय महिला टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 183 रन बनाए। भारत की ओर से बल्लेबाजों ने श्रीलंका के सामने मजबूत लक्ष्य रखा।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम 20 ओवर में 111 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह भारत ने मुकाबला 72 रन से जीतकर महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया।
भारत की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर एशियाई महिला क्रिकेट में अपना दबदबा कायम किया। हालांकि, खिताबी जीत के साथ हुआ पुरस्कार वितरण विवाद अब क्रिकेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।



