UP Smart School: UP के स्मार्ट स्कूल प्लान पर CJP का सवाल, सौरव दास बोले- बजट और घोषणा में बड़ा अंतर?

UP Smart School: यूपी में शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। CJP के आरोपों और शिक्षा विभाग के जवाब के बीच स्मार्ट स्कूल योजना चर्चा में है।

UP Smart School:  उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत संगठन के प्रवक्ता सौरव दास लगातार सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब उन्होंने राज्य सरकार की स्मार्ट स्कूल योजना और उससे जुड़े बजट प्रावधान पर भी सवाल खड़े किए हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट में क्या बोले सौरव दास?

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सरकारी स्कूलों के सोशल ऑडिट अभियान की शुरुआत के कुछ घंटों बाद ही राज्य सरकार ने हजारों प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में बदलने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि योजना के दायरे और बजट के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

उनका दावा है कि जिन स्कूलों को स्मार्ट बनाने की बात कही जा रही है, उनके मुकाबले बजट का प्रावधान काफी कम नजर आता है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान क्या है?

CJP द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को सामने लाना बताया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल, कक्षाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया जा रहा है।

संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए युवाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

नोएडा के स्कूलों को लेकर भी हुआ था विवाद

हाल ही में CJP की टीम ने नोएडा के कुछ सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद संगठन की ओर से स्कूलों की स्थिति को लेकर कई दावे किए गए थे।

हालांकि, गौतम बुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा विभाग ने कुछ आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा था कि जिले के सरकारी स्कूल नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं और उन्हें बंद करने जैसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

सरकार और संगठन के दावों में अंतर

एक ओर CJP स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और बजट को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं शिक्षा विभाग अपने स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बताता रहा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की स्थिति, स्मार्ट स्कूल योजना और शिक्षा बजट को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल, यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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