TMC Symbol Dispute: TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को 4 महीने में फैसला करने का निर्देश
TMC Symbol Dispute: 'फैसला अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकता', सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से तय समयसीमा में विवाद सुलझाने को कहा
TMC Symbol Dispute: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न “घास-फूल” को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्पष्ट संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस तरह के मामलों को अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता और आयोग को चार महीने के भीतर अंतिम फैसला लेना चाहिए।
यह विवाद पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच नियंत्रण को लेकर चल रहा है। चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी गुट को “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और “फुटबॉल खिलाड़ी” चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम और “लिफाफा” चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह इस विवाद का अंतिम निपटारा कितने समय में कर सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि राजनीतिक दलों के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवादों को जल्द सुलझाया जाना चाहिए ताकि चुनावी प्रक्रिया प्रभावित न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दे, लेकिन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
ममता बनर्जी गुट की क्या दलील?
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का फैसला ऐसे समय लिया गया जब उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। उनका कहना था कि इससे पार्टी की पहचान और चुनावी तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला
चुनाव आयोग ने पार्टी में गुटीय विवाद को देखते हुए मूल TMC नाम और “घास-फूल” चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी थी। आयोग का कहना था कि अंतिम फैसला आने तक दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान देकर चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
अब चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि वह विवाद के अंतिम निपटारे के लिए क्या समयसीमा तय कर रहा है। अदालत की टिप्पणी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इस मामले की सुनवाई तेज हो सकती है। अंतिम फैसला यह तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस का मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा।
राजनीतिक रूप से यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी की पहचान, संगठनात्मक नियंत्रण और भविष्य की चुनावी रणनीति सीधे तौर पर इस फैसले से प्रभावित हो सकती है।



