India LPG Imports: LPG आयात में बड़ा फेरबदल, अमेरिका को पछाड़ UAE बना भारत का नंबर-1 सप्लायर

India LPG Imports: सितंबर में अमीरात से गैस की खेप 182% बढ़कर 5.47 लाख टन पहुंची, अमेरिकी आपूर्ति में 58% की गिरावट; खाड़ी देशों से आयात बढ़ने के बीच कुल LPG खरीद में आई कमी

India LPG Imports: भारत के रसोई गैस आयात में सितंबर 2026 के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लायर बन गया है। समुद्री व्यापार के आंकड़े जुटाने वाली कंपनी Kpler के अनुसार, सितंबर में UAE से भारत को करीब 5.47 लाख टन LPG की आपूर्ति हुई। इससे पहले लगातार छह महीने तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG आपूर्तिकर्ता बना हुआ था।

यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कारोबार प्रभावित हुआ है। सितंबर में UAE से आयात में तेज बढ़ोतरी हुई, जबकि अमेरिका से आने वाली LPG की मात्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कुवैत और कतर जैसे दूसरे खाड़ी देशों से भी भारत की गैस खरीद बढ़ी है।

एक महीने में UAE से आयात 182% बढ़ा

सितंबर में UAE से भारत को 5.47 लाख टन LPG मिली, जबकि अगस्त में यह मात्रा करीब 1.93 लाख टन थी। इस तरह एक महीने के भीतर अमीरात से होने वाली आपूर्ति में लगभग 182% की वृद्धि दर्ज की गई।

भारत के कुल LPG आयात में UAE की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी। अगस्त में यह करीब 13% थी, जो सितंबर में बढ़कर लगभग 39% हो गई। इसी बढ़ोतरी ने UAE को भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना दिया।

घरेलू रसोई गैस की जरूरत पूरी करने के लिए भारत आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों के बीच हिस्सेदारी में होने वाला बदलाव देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

अमेरिका से आने वाली LPG में 58% की गिरावट

UAE के विपरीत अमेरिका से LPG की आपूर्ति सितंबर में काफी कम रही। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में अमेरिका से भारत को करीब 7.64 लाख टन LPG मिली थी, जो सितंबर में घटकर लगभग 3.23 लाख टन रह गई।

इस तरह अमेरिकी आपूर्ति में एक महीने के भीतर करीब 58% की कमी दर्ज हुई। भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी भी अगस्त के लगभग 53% से गिरकर सितंबर में करीब 23% रह गई।

अमेरिका फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी परेशानियां बढ़ने के बाद भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना था। उस दौरान खाड़ी क्षेत्र से होने वाली सप्लाई प्रभावित होने के कारण अमेरिकी गैस की अहमियत बढ़ गई थी। अब खाड़ी देशों से आपूर्ति में बदलाव के साथ भारत के आयात का रुख भी बदलता दिखाई दे रहा है।

कुल LPG आयात में भी आई कमी

UAE से गैस की आपूर्ति में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत का कुल LPG आयात सितंबर में बढ़ने के बजाय घट गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत ने सितंबर में करीब 13.9 लाख टन LPG आयात की, जो अगस्त के मुकाबले लगभग 4% कम है।

इससे स्पष्ट होता है कि किसी एक देश से आयात बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि देश की कुल गैस खरीद भी बढ़ गई है। सितंबर में UAE की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन दूसरे स्रोतों से आने वाली गैस की मात्रा में हुए बदलाव के कारण कुल आयात में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

कुवैत और कतर से भी बढ़ी गैस की आपूर्ति

सितंबर के दौरान खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों से भारत को मिलने वाली LPG की मात्रा में भी इजाफा हुआ।

  • कुवैत: करीब 1.33 लाख टन LPG की आपूर्ति हुई, जो अगस्त से लगभग 15.6% अधिक है।
  • कतर: आयात बढ़कर करीब 1.15 लाख टन पहुंच गया। इसमें महीने-दर-महीने लगभग 76% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • ईरान: भारत को करीब 89,000 टन LPG मिली।
  • ओमान और कांगो: दोनों देशों से लगभग 23,000-23,000 टन गैस की आपूर्ति हुई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की LPG खरीद कई देशों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर है। अलग-अलग स्रोतों से गैस मिलने के कारण किसी एक देश से आपूर्ति घटने या बढ़ने पर आयात का पूरा समीकरण बदल सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है सप्लायर देशों में बदलाव?

LPG का इस्तेमाल घरों में खाना पकाने के अलावा होटल, रेस्तरां और कई व्यावसायिक गतिविधियों में भी किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता, परिवहन मार्गों और आपूर्तिकर्ता देशों की स्थिति का महत्व बढ़ जाता है।

UAE से आयात बढ़ने और अमेरिका से सप्लाई घटने का असर फिलहाल भारत के आयात के स्रोतों के बंटवारे में दिखाई दे रहा है। हालांकि, केवल आयात के आंकड़ों के आधार पर घरेलू बाजार में LPG की कीमतों या उपलब्धता में तत्काल बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

आने वाले महीनों में भारत की LPG खरीद किस देश से कितनी होगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों, आपूर्ति व्यवस्था और अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली गैस पर निर्भर करेगा।

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