Ankita Bhandari Case : राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग
Ankita Bhandari Case : अंकिता भंडारी हत्याकांड में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर पुनर्विचार और जांच पूरी होने तक पदभार रोकने की मांग की।

Ankita Bhandari Case : अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। राहुल गांधी ने आग्रह किया है कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार न सौंपा जाए।
राहुल गांधी का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘VIP’ की पहचान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुष्यंत गौतम का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में आया है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ इस मामले में किसी जांच रिपोर्ट में ठोस सबूत सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में नियुक्ति को लेकर कांग्रेस की मांग ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से क्या अपील की?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या सितंबर 2022 में हुई थी। मामले में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, घटना से जुड़े कथित VIP की पहचान को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में अंकिता के परिवार और अन्य लोगों की आशंकाओं का उल्लेख करते हुए दुष्यंत गौतम की प्रस्तावित नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने राष्ट्रपति से केंद्र सरकार को नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह देने और जांच पूरी होने तक पदभार रोकने का अनुरोध किया।
कांग्रेस नेता का तर्क है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम राजनीतिक आरोपों या सार्वजनिक चर्चाओं में आने मात्र से उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं होता।
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर क्यों उठा विवाद?
केंद्र सरकार की ओर से दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी मामले ने फिर से राजनीतिक चर्चा में जगह बनाई। इस घटनाक्रम के बीच अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी वहां पहुंचे थे।
इसके बाद राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलना और मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ अंकिता भंडारी हत्याकांड में संलिप्तता साबित करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने आने की पुष्टि नहीं है। इसलिए इस मामले में आरोपों, आशंकाओं और जांच में स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
क्या राज्यपाल बनने के बाद आपराधिक कार्रवाई पर रोक लग जाती है?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में राज्यपाल को प्राप्त संवैधानिक संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आशंका जताई कि दुष्यंत गौतम के राज्यपाल बनने से जांच प्रभावित हो सकती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके पद पर रहते हुए कुछ प्रकार की कानूनी कार्यवाहियों से संरक्षण प्राप्त है। इसके तहत उनके कार्यकाल के दौरान आपराधिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने और गिरफ्तारी अथवा कारावास की प्रक्रिया पर संवैधानिक प्रतिबंध लागू होते हैं।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आरोप स्वतः समाप्त हो जाते हैं या जांच के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं। इस संरक्षण का सटीक दायरा मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 74(1) का हवाला देते हुए नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह देने का अनुरोध भी किया है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित एक रिसॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी सितंबर 2022 में लापता हो गई थीं। 24 सितंबर 2022 को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी।
जांच में सामने आए अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, अंकिता पर रिसॉर्ट में आने वाले एक कथित VIP को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया गया था। आरोप था कि विरोध करने पर उनकी हत्या कर दी गई।
इस मामले में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को 30 मई 2025 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद कथित VIP की पहचान को लेकर सवाल और विवाद जारी रहे हैं।
VIP के नाम को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP की पहचान लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दल सरकार से जवाब मांगते रहे हैं। दुष्यंत गौतम का नाम भी आरोपों और चर्चाओं के संदर्भ में सामने आया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें इस हत्याकांड से जोड़ने वाला कोई ठोस निष्कर्ष स्थापित नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी के राष्ट्रपति को लिखे पत्र के बाद अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की ओर से संभावित प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल कांग्रेस की प्रमुख मांग है कि मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार न दिया जाए।



