Gig Workers: गिग वर्कर्स के लिए सरकार ने बनाया सोशल सिक्योरिटी बोर्ड
Gig Workers: Swiggy-Zomato और Uber-Ola के कामगारों के लिए पीएफ व बीमा योजनाओं पर देगा सुझाव।
Gig Workers: Swiggy, Zomato, Uber और Ola जैसी कंपनियों के साथ काम करने वाले लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम पहल की है। श्रम मंत्रालय ने नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने, उनकी निगरानी करने और सरकार को सुझाव देने का काम करेगा।
इस पहल का उद्देश्य ऐसे कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है, जिन्हें पारंपरिक नौकरी की तरह नियमित वेतन और कर्मचारी कल्याण से जुड़ी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं। लंबे समय से गिग वर्कर्स के लिए भविष्य निधि (PF), बीमा और दूसरी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की मांग उठती रही है।
हालांकि, बोर्ड के गठन के साथ ही सभी गिग वर्कर्स को पीएफ और इंश्योरेंस का लाभ मिलना शुरू नहीं होगा। फिलहाल इसका काम जरूरतों का आकलन करना और सरकार को योजनाओं के संबंध में सिफारिशें देना है।
श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया होंगे बोर्ड के अध्यक्ष
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया करेंगे। बोर्ड को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अंतर को कम करने के लिए लक्षित योजनाओं पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के साथ पारंपरिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी शामिल होंगे। बोर्ड यह सुझाव देगा कि किन वर्गों के लिए किस तरह की कल्याणकारी योजनाएं बनाई जानी चाहिए और उनका लाभ जरूरतमंद कामगारों तक किस तरह पहुंचाया जा सकता है।
बोर्ड योजनाओं के वित्तपोषण यानी उनके लिए धन जुटाने के तरीकों और खर्च की व्यवस्था पर भी सरकार को सलाह देगा। इससे भविष्य में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियां तैयार करने में मदद मिल सकती है।
बोर्ड में कौन-कौन होगा शामिल?
इस बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ श्रमिकों, कंपनियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को भी जगह दी जाएगी। इसकी संरचना में विभिन्न पक्षों की भागीदारी रखी गई है, ताकि योजनाएं बनाते समय कामगारों और कंपनियों दोनों की जरूरतों को समझा जा सके।
बोर्ड में शामिल होंगे:
- केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि
- बड़ी कंपनियों के पांच प्रतिनिधि
- श्रमिकों के पांच प्रतिनिधि
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के प्रतिनिधि
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के प्रतिनिधि
- सिविल सोसाइटी के सदस्य
- श्रमिक संगठनों और यूनियनों के प्रतिनिधि
इस तरह बोर्ड में सरकारी संस्थाओं के साथ उन कंपनियों और श्रमिक संगठनों की भी भागीदारी होगी, जिनका गिग इकोनॉमी से सीधा संबंध है।
साल में कम से कम तीन बार होगी बैठक
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की साल में कम से कम तीन बैठकें होंगी। इन बैठकों में गिग और असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
बोर्ड सरकार को बताएगा कि कामगारों के लिए किस तरह की योजनाएं उपयोगी हो सकती हैं, उनके लिए धन कहां से जुटाया जाए और योजनाओं को लागू करने के बाद उनकी निगरानी कैसे की जाए।
इस प्रक्रिया के तहत श्रमिकों की जरूरतों और उनकी कामकाजी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिए जा सकते हैं। हालांकि, किसी नई पीएफ या बीमा योजना की शुरुआत की घोषणा फिलहाल नहीं की गई है। योजनाओं का स्वरूप और उन्हें लागू करने की समयसीमा आगे सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगी।
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत हुआ गठन
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस कानून का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों को एक व्यापक कानूनी ढांचे में लाना है।
मूल खबर के अनुसार, पहले के नौ सामाजिक सुरक्षा कानूनों को समाहित कर यह संहिता तैयार की गई थी। इसके दायरे में असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है।
इस कानून के जरिए ऐसे कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढांचा तैयार करने की व्यवस्था की गई है, जो नियमित कर्मचारी की पारंपरिक श्रेणी में नहीं आते। अब नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड इस दिशा में योजनाओं को लेकर सरकार को सुझाव देगा।
कौन होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?
गिग वर्कर्स ऐसे कामगार होते हैं, जो किसी एक कंपनी में स्थायी नौकरी करने के बजाय अलग-अलग काम या प्रोजेक्ट के आधार पर कमाई करते हैं। वे अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार काम चुन सकते हैं। फ्रीलांसर, स्वतंत्र पेशेवर और अस्थायी काम करने वाले लोग इसके उदाहरण हो सकते हैं।
वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे कामगार होते हैं, जो डिजिटल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम हासिल करते हैं और उसे पूरा करके कमाई करते हैं। Swiggy और Zomato के डिलीवरी पार्टनर्स, Uber और Ola के ड्राइवर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
इन कामगारों का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा होता है, लेकिन उनकी रोजगार व्यवस्था पारंपरिक नौकरी से अलग हो सकती है। इसी वजह से उनके लिए सामाजिक सुरक्षा, बीमा और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं को लेकर अलग व्यवस्था की जरूरत महसूस की जाती रही है।
पीएफ और इंश्योरेंस को लेकर क्या है उम्मीद?
गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा है। पारंपरिक नौकरी में कर्मचारियों को नियमों और पात्रता के अनुसार भविष्य निधि, स्वास्थ्य बीमा और दूसरी सुविधाएं मिल सकती हैं। लेकिन ऐप आधारित काम करने वाले लोगों के लिए ऐसी सुविधाओं की उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है।
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड इस अंतर को कम करने के लिए योजनाओं की सिफारिश करेगा। इसमें पीएफ, बीमा और दूसरी कल्याणकारी सुविधाओं से जुड़े विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि बोर्ड की सिफारिश और किसी योजना का लागू होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। गिग वर्कर्स को कौन-सी सुविधा मिलेगी, उसकी पात्रता क्या होगी और उसका खर्च कौन उठाएगा, यह सरकार की ओर से योजना और नियम तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
गिग इकोनॉमी के कामगारों के लिए क्यों अहम है यह पहल?
देश में ऐप आधारित सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ने के साथ गिग वर्कर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण हुई है। भोजन की डिलीवरी, कैब सेवा, सामान की आपूर्ति और अन्य डिजिटल सेवाओं में बड़ी संख्या में लोग काम कर रहे हैं।
इनमें से कई कामगारों की आमदनी काम की उपलब्धता, ऑर्डर और काम के घंटों पर निर्भर करती है। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना या काम बंद होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा की जरूरत बढ़ जाती है।
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन से इन कामगारों की जरूरतों पर संस्थागत स्तर पर विचार करने का रास्ता बना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर सरकार किस तरह की योजनाएं तैयार करती है और उनका लाभ किन कामगारों को मिल पाता है।



