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Ramgopal Yadav: यूपी में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान, रामगोपाल यादव ने लगाया सपा समर्थकों के नाम काटने का आरोप

Ramgopal Yadav: सपा सांसद का दावा- हर विधानसभा में 10 हजार वोट हटाने का लक्ष्य, एसडीएम के आईडी-पासवर्ड के दुरुपयोग का लगाया आरोप

Ramgopal Yadav: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में कुछ अधिकारियों के आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल भाजपा कार्यकर्ताओं के जरिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और भाजपा समर्थकों के नाम जोड़े जा रहे हैं।

रामगोपाल यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग से मामले का संज्ञान लेने और कथित रूप से शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित गतिविधि के तहत प्रदेश की हर विधानसभा सीट पर करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य रखा गया है।

एसडीएम के आईडी-पासवर्ड के इस्तेमाल का लगाया आरोप

सपा सांसद ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ऐसे अधिकारियों को एसडीएम के पद पर तैनात किया जा रहा है, जो अपना आईडी और पासवर्ड भाजपा के किसी कार्यकर्ता को उपलब्ध करा देते हैं। उनके मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ता वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) में बैठकर इन लॉगिन विवरणों का इस्तेमाल करते हुए मतदाता सूची में बदलाव कर रहे हैं।

रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में सपा समर्थकों के नाम हटाने और भाजपा समर्थकों के नाम जोड़ने का काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित आईडी से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी को भाजपा कार्यकर्ता ही स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का दावा

रामगोपाल यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि कथित तौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 हजार सपा समर्थकों के वोट हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस पूरे मामले की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की।

सपा सांसद के आरोप ऐसे समय आए हैं, जब समाजवादी पार्टी पहले से ही मतदाता सूची में गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग तथा भाजपा को घेर रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।

अखिलेश यादव भी लगातार उठा रहे हैं वोटर लिस्ट का मुद्दा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। पार्टी की ओर से आरोप लगाया जाता रहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उसके समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है।

सपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। वहीं, रामगोपाल यादव ने अधिकारियों के लॉगिन विवरण के कथित इस्तेमाल का मुद्दा उठाकर मामले को और गंभीर बना दिया है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की जांच और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिया जवाब

रामगोपाल यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आधिकारिक एक्स अकाउंट से भी प्रतिक्रिया दी गई है। निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि यदि प्रदेश की किसी भी विधानसभा के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के संबंध में इस तरह की शिकायत या संदेह है, तो उसे चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया जाए।

कार्यालय की ओर से कहा गया कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इस जवाब के बाद अब यह देखना होगा कि सपा की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत और साक्ष्य आयोग को सौंपे जाते हैं या नहीं।

मतदाता सूची की निष्पक्षता पर बढ़ी राजनीतिक बहस

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। समाजवादी पार्टी जहां नाम काटे जाने और कथित गड़बड़ियों का आरोप लगा रही है, वहीं निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल रामगोपाल यादव के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। चुनाव आयोग की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट से ही इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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