N Biren Singh: ‘मुझे CM पद से हटाने की साजिश हुई’, बीरेन सिंह का BJP के नेताओं पर आरोप; खेमचंद सरकार को भी घेरा
N Biren Singh: बीरेन सिंह ने खेमचंद सरकार पर उठाए सवाल, बोले- जनता मुझे फिर CM बनाना चाहती है।
N Biren Singh: मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता एन. बीरेन सिंह ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह की सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए। बीरेन सिंह का कहना है कि राज्य में जारी हिंसा और लोगों के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए सरकार को विधानसभा चुनाव से पहले जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
PTI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बीरेन सिंह ने दावा किया कि राज्य के कुछ नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर उनके खिलाफ योजना बनाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जनता उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर वापसी को लेकर कोई निश्चित दावा नहीं किया और कहा कि इस तरह का फैसला चुनाव में पार्टी को मिलने वाले बहुमत पर निर्भर करेगा।
‘2017 से मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं हुआ’
बीरेन सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से ही राज्य के कुछ BJP नेताओं का उनके प्रति रवैया ठीक नहीं रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि राज्य के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, कुछ विधायक इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि कांग्रेस से BJP में आने के बाद वह दो बार मुख्यमंत्री कैसे बन गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं ने पार्टी को अपनी निजी संपत्ति समझ लिया था और इसी वजह से उनके खिलाफ साजिश रची गई।
बीरेन सिंह ने दावा किया कि योजना बनाकर उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलवाया गया। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह का भी उल्लेख किया और कहा कि वह उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने 2025 में उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी हिंसा पर उठाए सवाल
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को लेकर बीरेन सिंह ने वर्तमान सरकार से सवाल किया कि फरवरी 2025 में उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी राज्य में शांति क्यों नहीं लौट सकी। उन्होंने पूछा कि उन्हें हटाने से हिंसा रोकने में आखिर कितनी मदद मिली।
पूर्व मुख्यमंत्री ने नागा और कुकी समुदायों से जुड़े हिंसक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में तनाव अब भी बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले हिंसा के लिए उन्हें बहुसंख्यक समुदाय का पक्ष लेने वाला बताया जाता था, लेकिन उनके पद से हटने के बाद भी अलग-अलग समुदायों के बीच संघर्ष जारी है।
उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि अब ईसाई समुदायों के बीच भी टकराव की स्थिति सामने आ रही है। बीरेन सिंह ने यूरोपीय संघ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि मणिपुर के मौजूदा हालात पर उसकी प्रतिक्रिया कहां है।
यूरोपीय संसद के प्रस्ताव पर भी जताई नाराजगी
बीरेन सिंह ने जुलाई 2023 में यूरोपीय संसद की ओर से मणिपुर की जातीय हिंसा पर पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। उस प्रस्ताव में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, हिंसा समाप्त करने और घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यूरोपीय संसद के इस रुख पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मणिपुर की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह प्रतिक्रिया दी गई, उस पर भी सवाल उठने चाहिए।
खेमचंद सरकार के कामकाज से नाखुश हैं बीरेन सिंह
वर्तमान मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए बीरेन सिंह ने कहा कि BJP को जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए अपने प्रमुख मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने चिंता जताई कि यदि सरकार अपने घोषित एजेंडे पर काम करती हुई नहीं दिखाई दी, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने खास तौर पर नशा विरोधी अभियान और अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया। बीरेन सिंह के अनुसार, इन अभियानों को जारी रखने की जरूरत है, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उन्हें अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया भी जारी रहनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि ऐसे लोगों को तत्काल देश से बाहर भेजना संभव नहीं है, तो कम से कम उनकी पहचान कर उन्हें निर्धारित शिविरों में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले शुरू की गई पहलों को आगे बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि इसका संबंध मणिपुर के भविष्य और सुरक्षा से है।
केंद्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप की उम्मीद
बीरेन सिंह ने उम्मीद जताई कि BJP का केंद्रीय नेतृत्व मणिपुर में पैदा हुई राजनीतिक स्थिति को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को विधानसभा चुनाव से पहले जनता के बीच जाकर अपने काम और योजनाओं की जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने सीमा पर बाड़ लगाने, संदिग्ध अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान और नशा विरोधी अभियान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, जनता को यह भरोसा दिलाना होगा कि BJP के पास मणिपुर के भविष्य को लेकर स्पष्ट योजना है।
‘लोग मुझे फिर मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं’
इंटरव्यू के दौरान जब बीरेन सिंह से पूछा गया कि यदि BJP दोबारा सत्ता में आती है, तो क्या वह मुख्यमंत्री पद पर लौटना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा।
उन्होंने दावा किया कि जनता की ओर से उन्हें फिर मुख्यमंत्री बनाने की काफी मांग उठ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला पार्टी को मिलने वाले बहुमत और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
बीरेन सिंह के इन बयानों से मणिपुर BJP के भीतर नेतृत्व और सरकार के कामकाज को लेकर मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने राज्य में शांति बहाल करने, जनता का विश्वास जीतने और अपने राजनीतिक एजेंडे पर काम करने की चुनौती बनी हुई है।



