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Iran: ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, प्रतिबंध हटाने और जब्त रकम लौटाने की मांग

Iran: सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा- शर्तें मानी गईं तो कूटनीति का रास्ता खुल सकता है, हमले की स्थिति में सख्त जवाब देने की चेतावनी।

Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने बातचीत की संभावनाओं को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा है कि यदि अमेरिका उसकी सात शर्तें स्वीकार कर लेता है, तो दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा।

रेजाई के मुताबिक, सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनेई के निर्देशों के तहत ईरान अपनी सैन्य क्षमता और नए हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। ऐसे में एक ओर तेहरान ने बातचीत की संभावना जताई है, तो दूसरी ओर अमेरिका को अपनी मांगें मानने के लिए कहा है।

तेल निर्यात पर पाबंदी हटाने और रकम लौटाने की मांग

ईरान की सात शर्तों में आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और विदेशों में जमा उसकी रकम वापस दिलाने की मांग प्रमुख बताई गई है। तेहरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे और दूसरे देशों में रोकी गई ईरानी संपत्तियों को वापस करने का रास्ता साफ करे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कतर में ईरान के करीब 6 अरब डॉलर जमा हैं। ईरान इन पैसों तक अपनी पहुंच चाहता है। इसके साथ ही उसने अमेरिका से अपने ऊपर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग भी रखी है।

तेहरान का दावा है कि जून 2026 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका ने तेल निर्यात में छूट देने और नई पाबंदियां नहीं लगाने का भरोसा दिया था। ईरान अब इसी कथित समझौते का हवाला देकर अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत चाहता है।

परमाणु कार्यक्रम पर रियायत चाहता है अमेरिका

जहां ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अपनी विदेशों में जमा रकम की वापसी पर जोर दे रहा है, वहीं अमेरिका की प्राथमिकता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि बातचीत दोबारा शुरू होने से पहले तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ रियायतें दे।

यही मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत की राह में बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईरान अपनी शर्तों पर बातचीत करने की बात कह रहा है, जबकि अमेरिका पहले परमाणु गतिविधियों पर ठोस आश्वासन चाहता है।

दोनों पक्षों की मांगों में अंतर के कारण किसी समझौते तक पहुंचने की प्रक्रिया जटिल बनी हुई है। कूटनीतिक समाधान के लिए आर्थिक प्रतिबंधों, परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाना जरूरी होगा।

कतर के मध्यस्थों ने तेहरान में की 12 घंटे से ज्यादा बातचीत

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को कतर के मध्यस्थों ने ईरान की राजधानी तेहरान में 12 घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। इस चर्चा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्ते तलाशने से जुड़ा बताया गया है।

कतर पहले भी क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इस बार भी उसकी कोशिश दोनों पक्षों के बीच संवाद की गुंजाइश बनाए रखने की बताई जा रही है। हालांकि, बातचीत के नतीजे और किसी संभावित समझौते की शर्तों को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।

हमले की स्थिति में सख्त जवाब देने की चेतावनी

ईरान ने साफ किया है कि बातचीत की संभावना जताने का मतलब यह नहीं है कि वह किसी सैन्य कार्रवाई को नजरअंदाज करेगा। मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया तो तेहरान उसका कड़ा जवाब देगा।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनेई के निर्देशों के अनुसार ईरान के पास नए हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प मौजूद है। इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान कूटनीतिक बातचीत के साथ अपनी सैन्य तैयारी को भी अहमियत दे रहा है।

क्या बातचीत से खत्म हो सकता है तनाव?

ईरान की ओर से सात शर्तें रखे जाने और कतर के मध्यस्थों की बातचीत के बाद कूटनीतिक समाधान की संभावना पर चर्चा बढ़ी है। लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अपनी संपत्तियों की वापसी चाहता है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर रियायतों को प्राथमिकता दे रहा है।

ऐसे में बातचीत आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मांगों पर सहमति बनानी होगी। फिलहाल तेहरान ने कूटनीति का विकल्प खुला रखने की बात कही है, लेकिन किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और मध्यस्थों की कोशिशों पर नजर रहेगी।

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