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US Midterm Elections 2026: अमेरिकी चुनाव से पहले ओबामा और ट्रंप के बीच जुबानी जंग, 5,000 डॉलर के वादे पर भी छिड़ी चर्चा

US Midterm Elections 2026: ओबामा ने ट्रंप की नीतियों पर उठाए सवाल, राष्ट्रपति ने भी कसा तंज।

US Midterm Elections 2026:  अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच सियासी मुकाबला तेज हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं, वहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मैदान में उतर चुके हैं। दोनों नेताओं के बयानों से चुनावी माहौल में तल्खी बढ़ गई है।

ओबामा ने जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ के समर्थन में प्रचार करते हुए ट्रंप की व्यापार नीति, कनाडा पर लगाए गए टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध को लेकर आलोचना की। दूसरी ओर, ट्रंप ने ओबामा के चुनाव प्रचार में उतरने पर तंज कसते हुए कहा कि जब भी पूर्व राष्ट्रपति उनके खिलाफ प्रचार करते हैं, उनकी जीत होती है।

चुनावी रैलियों में अर्थव्यवस्था और महंगाई का मुद्दा भी चर्चा में है। ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर देने के अपने प्रस्ताव का जिक्र करते हुए फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में हैमबर्गर की कीमत को लेकर मजाक किया। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

ओबामा ने ट्रंप की टैरिफ नीति पर साधा निशाना

बराक ओबामा ने चुनाव प्रचार के दौरान कनाडा के खिलाफ ट्रंप की व्यापार नीति की आलोचना की। उन्होंने कनाडा के मशहूर मेपल सिरप और अभिनेता मार्टिन शॉर्ट का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उनके बयान का मकसद कनाडा के साथ अमेरिका के तनावपूर्ण व्यापारिक संबंधों और टैरिफ नीति पर सवाल उठाना था।

ओबामा ने कहा कि ट्रंप की नीतियों से कनाडा के लोगों में नाराजगी बढ़ी है। उन्होंने कनाडा के प्रति अमेरिकी प्रशासन के रवैये पर भी कटाक्ष किया। कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध खास तौर पर ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अहम हैं, क्योंकि दोनों देशों की आपूर्ति शृंखलाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में टैरिफ बढ़ने से उत्पादन लागत पर असर पड़ने की चिंता जताई जाती रही है।

ओबामा ने ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने युद्ध की स्थिति को लेकर कहा कि संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने विदेश नीति को भी चुनावी बहस का हिस्सा बनाया।

ट्रंप ने ओबामा के प्रचार पर किया कटाक्ष

ओबामा के चुनाव प्रचार में उतरने के बाद ट्रंप ने भी पूर्व राष्ट्रपति पर निशाना साधा। ओहायो में चुनावी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ओबामा के प्रचार को लेकर तंज कसते हुए कहा कि जब भी ओबामा उनके खिलाफ मैदान में उतरते हैं, उनकी जीत पक्की हो जाती है।

ट्रंप की यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाती है। ओबामा 2009 से 2017 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे, जबकि ट्रंप की राजनीति में ओबामा की नीतियों और उनके कार्यकाल का जिक्र अक्सर होता रहा है।

मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति स्वयं उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बनाए रखना उनके प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

5,000 डॉलर में सिर्फ हैमबर्गर मिलने की बात कहकर चर्चा में आए ट्रंप

चुनावी प्रचार के दौरान ट्रंप ने महंगाई और लोगों की खर्च उठाने की क्षमता यानी अफोर्डेबिलिटी के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के चुनाव जीतने की स्थिति में अमेरिकी वयस्क नागरिकों को 5,000 डॉलर देने के प्रस्ताव का जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर कोई इस रकम को लेकर उनके फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिसॉर्ट में जाता है, तो वहां 5,000 डॉलर में शायद एक हैमबर्गर और छोटा-सा डेजर्ट ही मिल पाए।

ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग कीमतों को लेकर सतर्क रहते हैं, उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी पर रैली में मौजूद लोगों ने हंसी और तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी।

हालांकि, महंगाई और रोजमर्रा के खर्च चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का यह बयान राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आलोचक इसे आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों के प्रति असंवेदनशील टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं, जबकि उनके समर्थकों ने इसे मजाकिया बयान माना।

अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर देने का क्या है प्रस्ताव?

ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण बनाए रखती है, तो अमेरिकी वयस्क नागरिकों को 5,000 डॉलर देने की योजना पर अमल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, टैरिफ से होने वाली आय इस तरह के भुगतान के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया, पात्रता की शर्तों और धन के वितरण का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। इतनी बड़ी रकम का भुगतान करने के लिए वित्तीय संसाधनों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी उठते हैं। इसलिए इसे फिलहाल ट्रंप के चुनावी वादे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि नागरिकों को मिलने वाली सुनिश्चित राशि के रूप में।

ट्रंप के इस वादे को लेकर अर्थव्यवस्था और सरकारी खर्च पर बहस तेज हो सकती है। चुनाव से पहले मतदाता यह भी देखेंगे कि राजनीतिक दल महंगाई, आवास, ईंधन, किराना और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत से जुड़े मुद्दों पर क्या समाधान पेश करते हैं।

चुनाव में महंगाई और जीवनयापन का खर्च बना बड़ा मुद्दा

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा के खर्च को लेकर मतदाताओं की चिंताएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। ईंधन, किराने के सामान, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन अपनी आर्थिक नीतियों और टैरिफ से होने वाली आय को लेकर दलील दे रहा है, जबकि डेमोक्रेटिक नेता बढ़ती लागत और आम परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को चुनावी बहस में उठा रहे हैं।

ट्रंप का 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव इसी बहस के बीच सामने आया है। हालांकि, किसी भी प्रस्ताव का वास्तविक असर उसके वित्तपोषण, लागू होने की शर्तों और नागरिकों तक पहुंचने वाले लाभ पर निर्भर करेगा।

3 नवंबर को होगा मध्यावधि चुनाव

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होंगे। इस दौरान प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए मतदान होना है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा, इसका असर राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे और आने वाले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा पर पड़ सकता है।

मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इनमें मतदाता प्रतिनिधि सभा के सभी सदस्यों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। नतीजों से यह संकेत भी मिलता है कि मतदाता मौजूदा प्रशासन के कामकाज को किस नजर से देख रहे हैं।

चुनाव से पहले ओबामा और ट्रंप के प्रचार अभियान ने राजनीतिक मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मतदाता अर्थव्यवस्था, महंगाई, विदेश नीति और अन्य प्रमुख मुद्दों पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।

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