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पॉक्सो केस में केंद्रीय मंत्री के बेटे बंदी साई भागीरथ गिरफ्तार, हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत

केंद्रीय मंत्री के बेटे बंदी साई भागीरथ को पॉक्सो केस में तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार किया, 21 मई को आएगा अग्रिम जमानत पर फैसला।

हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री के बेटे Bandi Sai Bhagirath को पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले भागीरथ ने शनिवार शाम अपने वकीलों के साथ पुलिस के सामने सरेंडर किया। इससे कुछ घंटे पहले Telangana High Court ने उन्हें तत्काल गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया था।

साइबराबाद पुलिस कमिश्नर Ramesh Reddy ने बताया कि भागीरथ को नारसिंगी इलाके से गिरफ्तार कर पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक मेडिकल जांच और पूछताछ के बाद उन्हें मेडचल की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री बोले- कानून से ऊपर कोई नहीं

मामले पर बयान जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को जांच में सहयोग के लिए पुलिस के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में हर व्यक्ति बराबर है, चाहे वह आम नागरिक हो या किसी मंत्री का बेटा।

उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए जांच में सहयोग करने का फैसला लिया गया है।

हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार

मामले की सुनवाई के दौरान Justice T. Madhavi Devi की वेकेशन बेंच ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि आदेश 21 मई को सुनाया जाएगा।

भागीरथ की ओर से वरिष्ठ वकील एस. निरंजन रेड्डी ने अदालत में दलील दी कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार है और शिकायत में पॉक्सो एक्ट के तहत ‘पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट’ का स्पष्ट आधार नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में दुर्भावनापूर्ण तरीके से गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।

पीड़िता पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

पीड़िता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पप्पू नागेश्वर राव ने अदालत में दावा किया कि आरोपी ने अन्य लड़कियों को भी परेशान किया है और समय आने पर वे भी सामने आएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि पीड़िता नाबालिग है और उसके दस्तावेजी प्रमाण अदालत में पेश किए जा चुके हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता की उम्र 17 वर्ष 3 महीने है और जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।

FIR के बाद बढ़ीं राजनीतिक चर्चाएं

मामले के सामने आने के बाद तेलंगाना की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।

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