दोनों जिलों के 13 शहरी निकायों के कुल 415 वार्डों में से 262 वार्डों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। यह कुल सीटों का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं BJP को 131 और कांग्रेस को सिर्फ 19 वार्डों में सफलता मिली।
भरतपुर-डीग में क्यों खास हैं ये नतीजे?
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र माना जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय भूमिका भी निभाई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और टिकट वितरण को लेकर असंतोष ने निर्दलीयों को फायदा पहुंचाया।
भरतपुर नगर निगम में भी निर्दलीयों का दबदबा
सबसे बड़ा परिणाम भरतपुर नगर निगम से सामने आया। 65 वार्डों वाले निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 सीटें जीत लीं।
वहीं BJP को 20 और कांग्रेस को केवल 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा। अन्य सीटें छोटे दलों के खाते में गईं।
कई नगर निकायों में दो-तिहाई तक सीटें जीते निर्दलीय
भरतपुर जिले की बयाना, भुसावर, नदबई, वैर और रूपवास जैसी नगरपालिकाओं में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया।
डीग जिले में भी यही रुझान देखने को मिला। डीग नगर परिषद, कामां, कुम्हेर, पहाड़ी और सिकरी जैसे क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में वार्ड अपने नाम किए।
BJP और कांग्रेस की नजर अब निर्दलीयों पर
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब महापौर और अध्यक्ष पदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने में लगे हैं।
BJP का दावा है कि अधिकांश निर्दलीय विजेता पार्टी समर्थक हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि निर्दलीयों का झुकाव उसके पक्ष में है।
बोर्ड गठन की तैयारी शुरू
राजस्थान में महापौर और नगर निकाय अध्यक्ष पदों के चुनाव 21 सितंबर को होने हैं। इसके बाद 22 सितंबर को उप महापौर और उपाध्यक्ष चुने जाएंगे।
ऐसे में भरतपुर और डीग के निर्दलीय पार्षद आगामी दिनों में स्थानीय सत्ता के गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनके समर्थन पर ही कई निकायों में बोर्ड गठन का समीकरण तय होगा।