National Political News: कॉकरोच जनता पार्टी को रजिस्टर कराने की मांग, चुनाव आयोग पहुंचा वकील; सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी विवाद
पानीपत के वकील सुधीर जाखड़ ने चुनाव आयोग में दी अर्जी, CJP के नाम और लोगो पर दावा ठोकने की तैयारी
National Political News: सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा बनती जा रही है। हरियाणा के पानीपत निवासी वकील सुधीर जाखड़ ने चुनाव आयोग में पार्टी को अपने नाम से रजिस्टर कराने के लिए आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने यह अर्जी जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A के तहत दी है।
सुधीर जाखड़ खुद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बता रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों में पार्टी का ‘कॉकरोच’ लोगो और अपने वकील होने का विवरण भी शामिल किया है। अगर चुनाव आयोग से मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल पहचान पर भी उनका दावा मजबूत हो सकता है।
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं CJP के संस्थापक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत अभिजीत दिपके नाम के युवक ने की थी, जो वर्तमान में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। सुधीर जाखड़ का कहना है कि उन्होंने दिपके से भारत आकर पार्टी को आधिकारिक रूप से रजिस्टर कराने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
जाखड़ के अनुसार, अगर समय रहते पार्टी को रजिस्टर नहीं कराया जाता, तो कोई अन्य व्यक्ति इस नाम का गलत इस्तेमाल कर सकता था। इसी वजह से उन्होंने खुद आगे बढ़कर चुनाव आयोग में आवेदन देने का फैसला किया।
पार्टी के बताए गए उद्देश्य
चुनाव आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों में पार्टी के कई उद्देश्य बताए गए हैं। इनमें लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाना, शासन का सामाजिक ऑडिट, पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण, कानूनी जागरूकता, पारदर्शिता, सांप्रदायिक सौहार्द और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि, CJP की मूल वायरल मांगें इससे अलग बताई जा रही हैं। सोशल मीडिया पर पार्टी जिन पांच प्रमुख मांगों को लेकर चर्चा में आई थी, उनमें राज्यसभा में रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर रोक, वोट हटाने वालों पर कड़ी कार्रवाई, संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50% आरक्षण, बड़े उद्योगपतियों के मीडिया लाइसेंस रद्द करना और दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल का प्रतिबंध शामिल था।
कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का ट्रेंड?
CJP की शुरुआत उस समय चर्चा में आई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को लेकर दिए गए एक बयान पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बयान में कुछ युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने का आरोप लगा था, जिसके बाद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से ऑनलाइन अभियान शुरू कर दिया।
देखते ही देखते यह अभियान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। खबरों के अनुसार, पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट ने बेहद कम समय में लाखों फॉलोअर्स जुटा लिए थे। वहीं, इसका X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट कुछ दिनों बाद भारत में ब्लॉक भी कर दिया गया।
चुनाव आयोग के पास क्या अधिकार हैं?
चुनाव आयोग के पास ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के तहत राजनीतिक दलों के अधिकृत पदाधिकारियों को मान्यता देने का अधिकार होता है। इसी व्यवस्था के तहत पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे मामलों में भी आयोग ने हस्तक्षेप किया था।
अगर आवेदन स्वीकार हो जाता है, तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा मिल सकता है।



