Dharmendra Pradhan Profile: धर्मेंद्र प्रधान कौन हैं? छात्र राजनीति से शिक्षा मंत्री और इस्तीफे तक का पूरा राजनीतिक सफर

Dharmendra Pradhan Profile: केंद्रीय राजनीति में लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में अहम भूमिका निभाने वाले धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले प्रधान ने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में केंद्र सरकार में पेट्रोलियम, कौशल विकास और शिक्षा जैसे बड़े मंत्रालयों का नेतृत्व किया। हाल ही में NEET पेपर लीक विवाद के बीच उनके इस्तीफे के बाद वह फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। युवावस्था में ही उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठनात्मक कार्यों के जरिए भाजपा में अपनी अलग पहचान बनाई। ओडिशा से आने वाले प्रधान ने पार्टी के युवा मोर्चा में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी संगठन क्षमता और राजनीतिक अनुभव के चलते भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपीं।

मोदी सरकार में बढ़ता कद

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्होंने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में कई अहम फैसले लिए और बाद में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारों को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। भाजपा के भीतर उन्हें संगठन और सरकार के बीच मजबूत समन्वय बनाने वाले नेताओं में माना जाता है।

NEET विवाद और बढ़ता राजनीतिक दबाव

साल 2026 में NEET पेपर लीक विवाद ने देशभर में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन खड़ा कर दिया। छात्रों के प्रदर्शन, विपक्ष के लगातार हमलों और संसद से लेकर सड़कों तक उठ रहे सवालों के बीच धर्मेंद्र प्रधान पर जवाबदेही का दबाव बढ़ता गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बना दिया। कई दौर की राजनीतिक खींचतान के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारतीय राजनीति का एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने मंत्री पद छोड़ा है, लेकिन भाजपा में उनकी संगठनात्मक भूमिका और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि वह आगे भी पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। वहीं शिक्षा मंत्रालय के लिए नया नेतृत्व और परीक्षा प्रणाली में सुधार अब केंद्र सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी.

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