Mau Political News: घोसी विधानसभा उपचुनाव पर सवाल, 6 महीने बाद भी नहीं हुआ चुनाव का ऐलान
सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली पड़ी सीट, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के बावजूद उपचुनाव की तारीख का इंतजार
Mau Political News: जनपद मऊ की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट 354-घोसी को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—आखिर घोसी विधानसभा का उपचुनाव कब होगा?
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता एवं तत्कालीन विधायक सुधाकर सिंह के आकस्मिक निधन के बाद यह सीट पिछले छह महीनों से अधिक समय से रिक्त पड़ी हुई है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद अब तक निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा न किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या कहता है चुनावी कानून?
संवैधानिक एवं कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151ए के तहत यदि विधानसभा या संसद की कोई सीट निधन, इस्तीफा अथवा अन्य किसी कारण से रिक्त होती है, तो निर्वाचन आयोग के लिए छह महीने के भीतर उस सीट पर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है।
घोसी विधानसभा के विधायक सुधाकर सिंह का निधन 20 नवंबर 2025 को हुआ था। इस आधार पर छह महीने की अवधि मई 2026 में पूरी हो चुकी है। नियमानुसार इस अवधि के भीतर उपचुनाव संपन्न हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक चुनाव की घोषणा नहीं हुई है।
आखिर क्यों नहीं हुआ उपचुनाव?
सामान्य परिस्थितियों में छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना आवश्यक होता है। हालांकि कानून में दो विशेष परिस्थितियों में इस नियम से छूट का प्रावधान है—
1. यदि विधानसभा का कार्यकाल एक वर्ष से कम शेष हो
यदि संबंधित विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम बचा हो, तो निर्वाचन आयोग उपचुनाव न कराने का निर्णय ले सकता है। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2027 तक है, इसलिए घोसी सीट के मामले में यह प्रावधान लागू नहीं होता।
2. विशेष परिस्थितियों में चुनाव कराना संभव न हो
यदि निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार से परामर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाले कि कानून-व्यवस्था, प्राकृतिक आपदा या अन्य गंभीर कारणों से निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं है, तो उपचुनाव टाला जा सकता है।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी देरी
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि घोसी क्षेत्र में ऐसी कोई आपात स्थिति या कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, जिसके कारण चुनाव टालना आवश्यक हो। ऐसे में उपचुनाव की घोषणा में हो रही देरी को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं।
बिना विधायक के क्षेत्र पर क्या असर?
पिछले छह महीनों से अधिक समय से विधायक न होने के कारण घोसी विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय समस्याओं, सड़क, बिजली, पानी तथा अन्य जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए क्षेत्र के पास कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है।
विधायक निधि से प्रस्तावित कई विकास कार्य भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र की जनता के बीच धीरे-धीरे असंतोष बढ़ने की चर्चा है।
चुनाव आयोग की ओर टिकी हैं निगाहें
घोसी की जनता के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल संभावित उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग के हाथ में है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्वाचन आयोग घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कब करता है और पूर्वांचल की इस महत्वपूर्ण सीट पर चुनावी रणभेरी कब बजती है।



