नैरोबी। भारत ने यूएन पर्यावरण कार्यक्रम में सतत विकास के लिए जताई प्रतिबद्धता
नैरोबी। केन्या के नैरोबी में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थायी प्रतिनिधियों की समिति की 173वीं बैठक में भारत ने अपना राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। केन्या में भारतीय उच्चायुक्त और यूएनईपी में भारत के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. आदर्श स्वैका ने पर्यावरण के मोर्चे पर भारत द्वारा की गई सकारात्मक और ठोस कार्रवाइयों को रेखांकित किया।

उन्होंने बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि भारत ने वैश्विक पर्यावरण शासन और सतत विकास के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया है। भारतीय प्रतिनिधि ने जोर देते हुए कहा भारत ने पर्यावरण संरक्षण और सतत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अपनी नीतियों, विशेषकर ‘मिशन लाइफ’ के सिद्धांतों को वैश्विक मंच पर साझा किया है।
केन्या स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा स्थायी प्रतिनिधि आदर्श स्वैका ने नैरोबी स्थित यूएनओएन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की स्थायी प्रतिनिधियों की समिति की बैठक में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई सकारात्मक पहलों को रेखांकित करते हुए, वैश्विक पर्यावरण शासन और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
भारत समय-समय पर ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों के लिए पर्याप्त और अनुमानित जलवायु वित्त (क्लाइमेट फाइनेंस) की उपलब्धता की आवश्यकता पर भी जोर देता रहा है। इससे पहले भारत ने यूएनईए-6 में ‘सतत जीवन शैली की ओर व्यवहार परिवर्तन’ पर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जो ‘मिशन लाइफ’ से प्रेरित है। जबकि दिसंबर 2025 में यूएनईए-7 के दौरान भारत के उस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया, जिसमें दावानल (वाइल्डफायर) के प्रबंधन के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने की बात कही गई थी।
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भारत ने सकारात्मक परिणामों के लिए एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करने और सतत नाइट्रोजन प्रबंधन पर वैश्विक प्रस्तावों का नेतृत्व भी किया है। यूएनईपी और भारत सरकार मिलकर ओडिशा, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में ‘पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण’ (ईको-डीआरआर) पर काम कर रहे हैं, जिसमें आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) के संरक्षण पर जोर दिया गया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



