International Update: ट्रंप की जल्दबाजी, खामेनेई की हिचकिचाहट! समझौते के बाद आया ईरान के सर्वोच्च नेता का बड़ा बयान

अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर मोजतबा खामेनेई ने जताई शुरुआती आपत्ति, देशहित में मंजूरी देने की कही बात

US-Iran Deal: कई महीनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और टकराव के बाद आखिरकार दोनों देशों ने समझौते पर मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद अब ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।

खामेनेई ने कहा कि इस समझौते को लेकर शुरुआत से उनके मन में कई सवाल और आपत्तियां थीं। हालांकि, राष्ट्रपति पेजेश्कियान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए भरोसे के बाद उन्होंने इस डील को मंजूरी दी। उनका कहना है कि उन्हें विश्वास दिलाया गया कि समझौते में ईरान के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

उन्होंने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी पक्ष इस समझौते को लेकर बेहद उत्सुक था। खामेनेई के अनुसार, वॉशिंगटन ने इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए और तेजी दिखाई।

ईरानी सर्वोच्च नेता ने साफ किया कि किसी भी प्रकार की बातचीत का अर्थ यह नहीं है कि ईरान अपने विरोधियों की सभी शर्तों को स्वीकार कर लेगा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में अमेरिका की ओर से अत्यधिक या अस्वीकार्य मांगें रखी जाती हैं, तो उन्हें मानने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

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समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच कई महीनों से जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों का दावा है कि समझौते के प्रभावी होने के बाद दोनों देशों के बीच चल रहा टकराव समाप्त हो गया है और अब कूटनीतिक संवाद का नया दौर शुरू हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, समझौते से जुड़े दस्तावेजों को मध्यस्थ देशों और संबंधित पक्षों के साथ भी साझा किया गया है। इससे पहले दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी समझौते की प्रक्रिया को आगे बढ़ा चुके थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल पश्चिम एशिया की राजनीति पर असर डालेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

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