Lucknow Flood: लखनऊ में गोमती का बढ़ता पानी बना चुनौती, 90 नावों से रेस्क्यू; 35 परिवार सुरक्षित
Lucknow Flood: जलभराव वाले इलाकों में 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार, 20 पानी के टैंकर और 10 हजार लीटर पैकेज्ड वाटर की व्यवस्था; बीमारियों से बचाव के लिए ड्रोन से दवा का छिड़काव
Lucknow Flood: गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने रेस्क्यू से लेकर पेयजल, आश्रय और स्वच्छता तक की व्यवस्थाएं तेज कर दी हैं। जोन-3 और जोन-6 के कई इलाकों में नावों के जरिए लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। प्रशासन की 90 नावें राहत और बचाव अभियान में लगाई गई हैं।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने सैठा, लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राहत कार्यों में तेजी बनाए रखने के निर्देश दिए।
12 रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों के ठहरने की व्यवस्था
जलभराव से प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं। इनमें दाउद नगर में 10, जबकि लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक रैन बसेरा बनाया गया है। अब तक 26 लोग इन रैन बसेरों में रह रहे हैं, जबकि जोन-6 से करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
इसके अलावा पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। इन आश्रय स्थलों पर बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, रोशनी और मोबाइल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
पीने के पानी के लिए टैंकर और पैकेज्ड वाटर
जलभराव वाले इलाकों में लोगों को पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। इसके साथ ही 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है।
प्रशासन की ओर से राहत सामग्री की आपूर्ति और वितरण के लिए नगर निगम की टीमों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया गया है। दाउद नगर, लोहरामऊ और मिल्लत नगर में कर्मचारियों की अलग-अलग शिफ्टों में तैनाती की गई है।
नावों से पहुंचाई जा रही राहत सामग्री
प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार संचालित की जा रही हैं। सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड़ खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज जैसे इलाकों में नावों और स्टीमर के माध्यम से लोगों की आवाजाही कराई जा रही है।
जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नावों के जरिए खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे भी राहत सामग्री वितरण के लिए एक नाव विशेष रूप से लगाई गई है।
250 सफाईकर्मी संभाल रहे स्वच्छता की जिम्मेदारी
बाढ़ और जलभराव के बाद संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मियों को अभियान में लगाया गया है।
प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। इसके साथ ही मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए एंटी लार्वा और एमएलओ का इस्तेमाल किया जा रहा है।
150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से दवा का छिड़काव
जिन जलभराव वाले इलाकों में सामान्य मशीनों या कर्मचारियों के लिए पहुंचना मुश्किल है, वहां ड्रोन के जरिए दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है।
इसके अलावा छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के साथ एलएसए की दो बड़ी मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का जोर पानी उतरने के बाद संभावित संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों को फैलने से रोकने पर है।
राहत सामग्री के लिए बनाया गया अस्थायी भंडार केंद्र
नगर आयुक्त ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती यूनिवर्सिटी में बनाए गए अस्थायी भंडार केंद्र का भी निरीक्षण किया। यहां राहत सामग्री और जरूरी संसाधनों के भंडारण की व्यवस्था देखी गई।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जरूरत के अनुसार सामग्री को प्रभावित इलाकों तक जल्द पहुंचाया जाए और स्टॉक का व्यवस्थित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
पानी घटने के बाद भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति के लिए भी तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग टीमें तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पानी उतरने के बाद सड़कों और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे और गंदगी को हटाने के साथ ब्लीचिंग पाउडर, एंटी लार्वा और आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जाएगा। इसके साथ ही फॉगिंग अभियान चलाकर बीमारी फैलने की आशंका को कम करने की कोशिश होगी।
गोमती के बढ़ते जलस्तर के बीच फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने, जरूरी सामान पहुंचाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने पर है।



