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Meerut: मृत्युदंड के बाद मुस्कान और रविता ने मांगा निजी वकील, बच्चों से मिलने की जताई इच्छा

Meerut: मुस्कान बड़ी बेटी से, रविता बच्चों और पिता से मिलना चाहती है; दोनों ने निजी वकील मांगा।

Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड की सजा पाने वाली मुस्कान और रविता ने अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए निजी वकील उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही दोनों ने अपने परिवार से मिलने की इच्छा भी जताई है। सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी मुस्कान अपनी बड़ी बेटी पीहू से मिलना चाहती है, जबकि अमित कश्यप हत्याकांड में दोषी रविता ने अपने बच्चों और पिता से मुलाकात की इच्छा जाहिर की है।

दोनों महिलाओं को अलग-अलग मामलों में अक्टूबर में मृत्युदंड सुनाया गया था। अदालत के फैसले के बाद अब उनके पास कानूनी विकल्पों के इस्तेमाल और अपील की प्रक्रिया पर आगे बढ़ने का रास्ता है। जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों की निजी वकील की मांग पर नियमानुसार प्रक्रिया की जाएगी।

बड़ी बेटी से मिलना चाहती है मुस्कान

सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और उसके साथी साहिल को 14 अक्टूबर को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। सजा के बाद मुस्कान ने अपनी बड़ी बेटी पीहू से मिलने की इच्छा दोहराई है। बताया गया है कि वह इससे पहले भी जेल प्रशासन से बेटी से मुलाकात कराने की गुहार लगा चुकी है, लेकिन अभी तक मुलाकात नहीं हो पाई है।

मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू अपने नाना-नानी के साथ रह रही है, जबकि उसकी छोटी बेटी राधा फिलहाल मेरठ जिला जेल में उसके साथ है। बड़ी बेटी से मिलने की उसकी मांग के बाद अब परिवार और जेल प्रशासन के बीच समन्वय के जरिए मुलाकात की संभावना पर ध्यान रहेगा।

रविता ने बच्चों और पिता से मिलने की इच्छा जताई

अमित कश्यप हत्याकांड में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को 16 अक्टूबर को मृत्युदंड सुनाया गया था। अदालत के फैसले के बाद रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर चिंता जताई थी। अब उसने जेल प्रशासन के सामने अपने बच्चों और पिता से मिलने की इच्छा भी रखी है।

रविता के लिए परिवार से मुलाकात की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब उसे मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया से गुजरना है। जेल प्रशासन के मुताबिक, रविता और अमरदीप को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है।

निजी वकील उपलब्ध कराने के लिए किया आवेदन

मुस्कान और रविता दोनों ने अपने मामलों में आगे की कानूनी पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता की मांग की है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, दोनों के आवेदन पर निजी वकील उपलब्ध कराने की प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी।

मुस्कान के साथ साहिल और रविता के साथ अमरदीप के पास भी निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का कानूनी विकल्प है। अपील के दौरान संबंधित अदालतें मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर आगे की सुनवाई करेंगी।

मृत्युदंड के बाद भी बाकी रहती है कानूनी प्रक्रिया

निचली अदालत से मृत्युदंड सुनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में मृत्युदंड को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। दोषी पक्ष फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी राहत मांग सकता है।

इसके अलावा, लागू कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्यपाल या राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है। इसलिए दोनों मामलों में आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, मुस्कान और रविता की ओर से निजी वकील तथा परिवार से मुलाकात की मांग सामने आई है। इन आवेदनों पर होने वाली कार्रवाई और अदालतों में आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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