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NALANDA-UNIVERSITY-नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के हाथाें 31 देशों के विद्यार्थी स्वर्ण पदक से सम्मानित

NALANDA-UNIVERSITY- नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मंगलवार को मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल हुईं। विश्वविद्यालय परिसर पहुंचने पर कुलपति द्वारा राष्ट्रपति का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। यह ऐतिहासिक समारोह विश्वविद्यालय के नए स्थायी परिसर में आयोजित हुआ, जहां देश-विदेश के विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपलब्धियों का सम्मान किया गया।

दीक्षांत समारोह में 31 देशों के 600 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री और गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। कुल 36 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। इस वर्ष दीक्षांत समारोह के लिए 31 देशों के कुल 617 विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया था, जो विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान और शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है।

इस विशेष अवसर पर विद्यार्थियों की उपलब्धियां केंद्र में रहीं, जिन्होंने ज्ञान, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान एमबीए (सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट, 2022–24) के छात्र सौरभ कुमार सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह वर्तमान में ओएनजीसी में जियोसाइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं और भारत के पहले जियोथर्मल वेल ड्रिलिंग प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नालंदा में मिली शिक्षा ने उनके करियर को नई दिशा दी है।

वहीं, स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज (2020–22) की पूर्व छात्रा स्निग्धा, जो वर्तमान में जापान में एनवायर्नमेंटल टॉक्सिकोलॉजी में पीएचडी कर रही हैं, ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है। नालंदा लौटकर इस उपलब्धि का हिस्सा बनना उनके लिए भावनात्मक अनुभव रहा।

कश्मीर से आने वाली स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (2020–22) की पूर्व छात्रा सुश्री सीरत, जो फिलहाल ओएनजीसी इंडिया के साथ कार्यरत हैं, ने भी नालंदा विश्वविद्यालय से जुड़ाव को अपने जीवन का गर्व बताया और दीक्षांत समारोह में शामिल होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

दीक्षांत समारोह के अवसर पर नव-निर्मित ‘विश्वमित्रालय’ सभागार का उद्घाटन भी किया गया, जो भविष्य में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके साथ ही बिहार संग्रहालय के सहयोग से बौद्ध विरासत पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने नालंदा की समृद्ध ऐतिहासिक और वैश्विक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

यह समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि विश्वविद्यालय के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ, जिसने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान और उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को सुदृढ़ किया।

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