OP Rajbhar on Kharge: कांग्रेस ने 60 साल में कितना दिया, पहले ये बताओ’, खरगे के आरक्षण वाले बयान पर ओपी राजभर का पलटवार
आरक्षण और सरकारी नौकरियों को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों पर ओपी राजभर ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का हिसाब मांगते हुए यूपी में करीब 9 लाख सरकारी भर्तियों का दावा किया।
OP Rajbhar on Kharge: ओपी राजभर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आरक्षण को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के लंबे शासनकाल का हिसाब मांग लिया। राजभर ने कहा कि अगर कांग्रेस आज पिछड़े और दलितों को उनका हिस्सा नहीं मिलने की बात कर रही है, तो पहले उसे बताना चाहिए कि अपने 60 साल के शासन में उसने इन वर्गों के लिए क्या किया।
राजभर ने कहा कि आज विपक्ष की ओर से आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में रोजगार के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में करीब 9 लाख सरकारी नौकरियों में भर्ती की गई है। इसके साथ ही रोजगार मेलों के जरिए भी युवाओं को रोजगार देने का काम किया जा रहा है।
राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की ओर से किए जा रहे काम विपक्ष को दिखाई नहीं देते। उनका कहना था कि अगर विपक्ष की सरकार होती तो शायद उसे यही काम नजर आते। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
दरअसल, आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खरगे ने दावा किया कि सरकार सरकारी पदों को खाली रखकर और स्थायी नौकरियों की जगह ठेका व्यवस्था को बढ़ावा देकर आरक्षण के संवैधानिक अधिकार को कमजोर कर रही है।
खरगे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2015 में केंद्र सरकार में करीब 4.21 लाख पद खाली थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.24 लाख हो गई। उन्होंने रेलवे, रक्षा और गृह मंत्रालय में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने का दावा किया। खरगे के मुताबिक रेलवे में 2.40 लाख, डिफेंस में 2.41 लाख और गृह मंत्रालय में 1.10 लाख पद खाली हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म हुई हैं और ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19 फीसदी से बढ़कर 49 फीसदी हो गई है। खरगे का तर्क है कि जब सरकारी और स्थायी नौकरियां कम होती हैं, तो आरक्षण का लाभ पाने के अवसर भी कम हो जाते हैं।
खरगे ने इसे केवल रोजगार का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय बताया। उनका कहना था कि अगर सरकारी पद खाली रखे जाते हैं तो आरक्षण का अवसर खत्म होता है, सरकारी कंपनियों का निजीकरण होता है तो आरक्षित नौकरियों के अवसर घटते हैं और स्थायी नौकरियों की जगह ठेका व्यवस्था आने से भी आरक्षण प्रभावित होता है।
इसी बयान पर अब ओपी राजभर ने कांग्रेस को सीधे निशाने पर लिया है। राजभर का सवाल है कि कांग्रेस आज पिछड़े और दलितों के अधिकारों की बात कर रही है, लेकिन उसके लंबे शासनकाल में इन वर्गों के लिए क्या कदम उठाए गए, इसका भी हिसाब दिया जाना चाहिए।
आरक्षण को लेकर यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में सरकारी नौकरियों, सामाजिक न्याय और आरक्षण की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। एक तरफ कांग्रेस केंद्र सरकार पर आरक्षण को कमजोर करने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी और उसके सहयोगी दल सरकार की भर्ती और रोजगार संबंधी उपलब्धियों को सामने रखकर विपक्ष पर पलटवार कर रहे हैं।
ओपी राजभर का बयान इसी राजनीतिक बहस को उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ता है। खासतौर पर पिछड़े और दलित मतदाताओं को लेकर यूपी में सभी राजनीतिक दल लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आरक्षण, सरकारी नौकरी और सामाजिक न्याय का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक रूप से और ज्यादा अहम हो सकता है।



