Prashant Kishor Oath: प्रशांत किशोर ने ली विधायक पद की शपथ, बोले- बिहार के लिए कुछ सार्थक काम करना चाहता हूं

बांकीपुर उपचुनाव में BJP को हराने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार विधायक के तौर पर बिहार विधानसभा पहुंचे।

Prashant Kishor Oath: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को बिहार विधानसभा में बांकीपुर सीट से विधायक के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने उन्हें शपथ दिलाई। उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद यह पहला मौका है, जब प्रशांत किशोर औपचारिक रूप से जनप्रतिनिधि के तौर पर सदन का हिस्सा बने हैं।

शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार विधानसभा का सदस्य बनना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि वह सदन में मौजूद उन नेताओं और विधायकों से प्रेरणा लेने का संकल्प लेकर जा रहे हैं, जिन्होंने बिहार और समाज की बेहतरी के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस विधानसभा में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर, अनुग्रह नारायण सिंह, नीतीश कुमार, लालू यादव, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं ने सदस्य के तौर पर काम किया है, उसका सदस्य बनना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बिहार के लोगों और राज्य के लिए कुछ सार्थक काम करना है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। उन्हें कुल 64,151 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार को 44,827 वोट हासिल हुए। इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है।

बांकीपुर सीट पहले बीजेपी नेता नितिन नवीन के पास थी। उनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया। प्रशांत किशोर की जीत ने न सिर्फ जन सुराज पार्टी को पहली बड़ी चुनावी सफलता दिलाई, बल्कि बिहार की राजधानी पटना की इस महत्वपूर्ण सीट पर बीजेपी के लंबे राजनीतिक प्रभाव को भी चुनौती दी।

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राजनीतिक तौर पर प्रशांत किशोर का विधानसभा पहुंचना इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर देश की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के साथ काम करते रहे हैं। अब पहली बार वह सीधे चुनाव जीतकर सदन के भीतर विपक्ष और सरकार के सामने अपनी राजनीतिक भूमिका निभाएंगे।

प्रशांत किशोर ने शपथ के बाद जिस तरह बिहार के पुराने नेताओं का उल्लेख किया, उससे यह भी संकेत मिलता है कि वह खुद को बिहार की राजनीतिक परंपरा और विधानसभा की विरासत से जोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं। हालांकि, अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में अपने राजनीतिक एजेंडे को प्रभावी तरीके से रखने और बांकीपुर की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की होगी।

बांकीपुर में जीत के बाद जन सुराज पार्टी के लिए भी प्रशांत किशोर की विधानसभा में मौजूदगी महत्वपूर्ण है। यह जीत पार्टी के लिए सिर्फ एक सीट हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर प्रशांत किशोर की भूमिका और उनके मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन सकती है।

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