Haiwaan Movie: अक्षय-सैफ की ‘हैवान’ क्यों नहीं चली? प्रियदर्शन ने बताई फ्लॉप होने की बड़ी वजह
Haiwaan Movie: 'हैवान' की नाकामी पर निर्देशक प्रियदर्शन ने कहा कि दर्शक उन्हें और अक्षय कुमार को कॉमेडी फिल्मों में ज्यादा पसंद करते हैं।
Haiwaan Movie: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म ‘हैवान’ से मेकर्स को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन रिलीज के बाद फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल नहीं रही। बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन के बाद अब फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन ने इसकी असफलता पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
प्रियदर्शन का मानना है कि दर्शक उन्हें और अक्षय कुमार को मुख्य रूप से कॉमेडी फिल्मों में देखना पसंद करते हैं। उनके अनुसार जब भी दोनों ने गंभीर विषयों पर आधारित फिल्मों के साथ प्रयोग किया, उन्हें वैसा समर्थन नहीं मिला जैसा कॉमेडी फिल्मों को मिलता रहा है।
गंभीर फिल्मों को नहीं मिला अपेक्षित समर्थन
एक इंटरव्यू में प्रियदर्शन ने कहा कि ‘हैवान’ की असफलता को वह पूरी तरह स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब अक्षय कुमार के साथ उनकी किसी गैर-कॉमेडी फिल्म को दर्शकों ने ठंडा रिस्पॉन्स दिया हो।
निर्देशक ने याद दिलाया कि इससे पहले भी उनकी कुछ गंभीर फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। उनका मानना है कि दर्शकों ने उनकी जोड़ी को एक खास शैली से जोड़ लिया है और उसी तरह की फिल्मों में उन्हें देखना पसंद करते हैं।
बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जादू
11 सितंबर को रिलीज हुई ‘हैवान’ की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर सीमित कमाई ही कर सकी। वहीं विदेशी बाजारों में भी इसका प्रदर्शन कमजोर रहा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 130 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन लागत के मुकाबले काफी कम रहा, जिसके चलते इसे बॉक्स ऑफिस पर बड़ी असफलताओं में गिना जा रहा है।
कॉमेडी में सुपरहिट रही है जोड़ी
प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार कॉमेडी फिल्में दी हैं। ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’, ‘भूल भुलैया’ और ‘दे दना दन’ जैसी फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था।
हाल ही में रिलीज हुई उनकी कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। ऐसे में प्रियदर्शन का मानना है कि दर्शक आज भी उन्हें और अक्षय कुमार को हल्के-फुल्के मनोरंजन वाली फिल्मों में देखना ज्यादा पसंद करते हैं, जबकि गंभीर विषयों पर बनी फिल्मों को उतना समर्थन नहीं मिल पाता।



