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Ramlila Maidan Rally: प्रियंका गांधी को रैली में बोलने का मौका नहीं मिलने पर BJP का तंज, राहुल-प्रियंका के बीच मतभेद का दावा

Ramlila Maidan Rally: संबित पात्रा ने मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली का जिक्र कर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए

Ramlila Maidan Rally: कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बीच कथित मतभेदों का दावा किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि प्रतीकात्मक संसद और रामलीला मैदान में आयोजित रैली के दौरान प्रियंका गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए दावा किया कि गांधी परिवार के भीतर भी राजनीतिक खींचतान चल रही है।

संबित पात्रा ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि प्रियंका गांधी दोनों कार्यक्रमों में नाखुश नजर आईं। उन्होंने इसे कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के भीतर मतभेद का संकेत बताया। हालांकि, ये भाजपा की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। केवल किसी कार्यक्रम में संबोधन का अवसर नहीं मिलने के आधार पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद की पुष्टि नहीं होती।

संबित पात्रा ने मॉक पार्लियामेंट का किया जिक्र

भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि 1 नवंबर से पहले आयोजित प्रतीकात्मक संसद के कार्यक्रम में सांसदों के अलावा दूसरे लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया, लेकिन प्रियंका गांधी को संबोधित करने का अवसर नहीं मिला।

पात्रा ने दावा किया कि अगले दिन रामलीला मैदान में हुई रैली में भी विभिन्न नेताओं और वक्ताओं ने अपने मुद्दे रखे, लेकिन प्रियंका गांधी को बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए और राहुल गांधी पर तंज कसा।

अपने वीडियो संदेश में पात्रा ने गांधी परिवार के संदर्भ में ‘वोट चोरी’ का भी इस्तेमाल किया। उनका यह बयान कांग्रेस की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया।

रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली

इंडिया गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित की थी। यह कार्यक्रम चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच हुआ।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है। गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी विरोध दर्ज कराया।

इससे पहले शनिवार, 31 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया था। गठबंधन का आरोप था कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और इससे मतदान के अधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। ये विपक्ष के आरोप हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग और SIR को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। विपक्ष चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा नेता विपक्षी दलों के आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं।

रामलीला मैदान की रैली और प्रतीकात्मक संसद के कार्यक्रम इसी राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आयोजित किए गए। भाजपा ने अब इन कार्यक्रमों में प्रियंका गांधी को संबोधन का अवसर नहीं मिलने के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस के नेतृत्व पर निशाना साधा है।

फिलहाल, संबित पात्रा के बयान में राहुल और प्रियंका गांधी के बीच मतभेद होने का दावा किया गया है। कांग्रेस की ओर से इस खास आरोप पर क्या प्रतिक्रिया आती है और कार्यक्रमों में वक्ताओं के चयन को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, यह आगे स्पष्ट हो सकता है।

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