Iran-Israel War: ईरान संकट और ट्रंप की नाटो पर फटकार, बढ़ते तनाव से दुनिया चिंतित
Iran-Israel War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। ईरान के साथ चल रहे टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने NATO देशों पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सहयोगी देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका के बिना नाटो सिर्फ एक “कागज़ी शेर” बनकर रह जाता है।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि जब ईरान जैसे परमाणु क्षमता वाले देश को रोकने की बात आई, तब नाटो के सदस्य देश सक्रिय नहीं दिखे। लेकिन जैसे ही तेल की कीमतें बढ़ने लगीं, वही देश शिकायत करने लगे। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ट्रंप ने नाटो की निष्क्रियता पर निशाना साधा। उनका कहना था कि इस अहम समुद्री मार्ग को खोलना कोई जटिल सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि एक आसान कदम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस रास्ते के बंद होने से ही तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति की बात करें, तो हालात काफी गंभीर बने हुए हैं। Iran ने 4 मार्च से इस जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है और जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया है। बताया जा रहा है कि शुरुआती दिनों में इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों पर हमले भी हुए। ईरान का दावा है कि उसने समुद्र में माइंस बिछा दी हैं, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
जहां पहले हर दिन 100 से ज्यादा जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, अब सिर्फ गिने-चुने टैंकर ही यहां से निकल पा रहे हैं। वो भी ईरान की अनुमति के बाद ही आगे बढ़ते हैं। पिछले 24 घंटों में कोई भी कच्चे तेल का टैंकर यहां से नहीं गुजर पाया, जो हालात की गंभीरता को दिखाता है।
इस संकट के चलते करीब 3,200 जहाज और 20,000 से ज्यादा नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं। हालांकि ईरान ने कुछ ‘मित्र देशों’ जैसे भारत और चीन से जुड़े जहाजों को सीमित अनुमति दी है, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर अब भी रोक बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा भी गहरा गया है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का नाटो पर हमला और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति, दोनों मिलकर यह दिखाते हैं कि वैश्विक राजनीति कितनी तेजी से बदल रही है। यह केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस संकट का समाधान कैसे निकलता है और बड़े देश इसमें क्या भूमिका निभाते हैं।



