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‘डिजिटल भुगतान बना आर्थिक पहचान का सेतु’, दुनिया सीख रही भारत का मॉडल – पीएम के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा बोले

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने पुणे में NIBM के 20वें दीक्षांत समारोह में कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली आर्थिक पहचान और वित्तीय समावेशन का मजबूत माध्यम बन चुकी है। उन्होंने जनधन, आधार, UPI और मुद्रा योजना की सफलता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने शनिवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट के 20वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक पहचान और वित्तीय समावेशन का बड़ा माध्यम बन चुकी है।

पुणे, महाराष्ट्र में आयोजित इस समारोह में उन्होंने 2024-26 बैच के विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि आज बैंकिंग केवल कारोबार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह समावेशन, अवसर, विश्वास और राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

“ऋण आजीविका और नागरिक कल्याण के लिए जरूरी”

डॉ. मिश्रा ने कहा कि ऋण केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि आजीविका सृजन और नागरिकों के कल्याण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक ग्रामीण और गरीब वर्ग सस्ते संस्थागत ऋण से वंचित रहे, क्योंकि पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था सूचना असमानता और नीतिगत सीमाओं से जूझती रही।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने इन चुनौतियों को काफी हद तक दूर कर दिया है और अब डिजिटल माध्यमों से आम नागरिकों की औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच आसान हुई है।

जनधन, आधार और DBT से बदली तस्वीर

प्रधान सचिव ने कहा कि जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी ने वित्तीय समावेशन की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के जरिए अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि लोगों तक पहुंचाई जा चुकी है, जबकि लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की बचत भी हुई है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली अनौपचारिकता और औपचारिक आर्थिक भागीदारी के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभरी है।

UPI बना भारत की डिजिटल क्रांति का प्रतीक

डॉ. मिश्रा ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को वित्तीय लोकतंत्रीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि UPI के जरिए सालाना लेनदेन 24 हजार करोड़ से अधिक पहुंच चुका है और इससे छोटे कारोबारियों एवं बिना संपत्ति वाले लोगों को भी अपनी वित्तीय साख बनाने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अब भारत की डिजिटल सार्वजनिक प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं और भारत समावेशी डिजिटल वित्त की वैश्विक सोच को दिशा दे रहा है।

मुद्रा योजना और पीएम स्वनिधि का जिक्र

डॉ. मिश्रा ने कहा कि वित्तीय समावेशन को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और पारंपरिक कारीगरों को महंगे अनौपचारिक कर्ज से राहत दिलाई है।

AI और साइबर खतरों को लेकर दी चेतावनी

भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि एआई और साइबर खतरों के दौर में वित्तीय संस्थानों को तकनीकी नवाचार के साथ नैतिक जिम्मेदारी और जनविश्वास बनाए रखना होगा।

उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रणाली का वास्तविक उद्देश्य समाज की उत्पादक क्षमता को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उससे अलग हो जाना।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा भी रहे मौजूद

इस अवसर पर संजय मल्होत्रा, NIBM के निदेशक प्रो. पार्थ रे, वरिष्ठ संकाय सदस्य, अर्थशास्त्री और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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