महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - महिला सैन्य अधिकारियों को मिला स्थायी कमीशन का अधिकार। लैंगिक समानता पर जोर, भेदभावपूर्ण नीति पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) का अधिकार देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना आवश्यक है और महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को इससे वंचित रखना भेदभावपूर्ण है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने कहा कि महिला अधिकारियों के मूल्यांकन में गंभीर खामियां रही हैं। अदालत ने पाया कि वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) का आकलन लापरवाही से और पूर्वाग्रह के आधार पर किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थायी कमीशन के लिए हर साल 250 महिला अधिकारियों की सीमा तय करना मनमाना और असंवैधानिक है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार का उपयोग करते हुए कोर्ट ने सेना और नौसेना में महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अदालत ने टिप्पणी की कि पुरुष अधिकारियों के लिए यह मान लेना उचित नहीं है कि स्थायी कमीशन केवल उनके लिए आरक्षित रहेगा। यह फैसला भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करेगा और उन्हें समान अवसर प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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