International Update: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा टकराव! दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अहम समुद्री रास्ते पर संकट, ट्रंप के फैसलों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
International Update: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। Donald Trump और Iran के बीच बढ़ती तनातनी अब इस अहम समुद्री रास्ते पर आकर टिक गई है, जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और Oman के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार की धड़कन कहा जाता है, क्योंकि दुनिया के लगभग 25–30% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत समेत कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
हालिया घटनाक्रम में 2 मार्च को ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी थी और अपने सैन्य बलों के जरिए इसे नियंत्रित करने की बात कही थी। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई जहाज जबरन गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। ईरान ने इस कदम को अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के जवाब में उठाया था।
शुरुआत में Donald Trump का रुख इस जलमार्ग को खुलवाने का था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश की और यहां तक कि सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया। कुछ समय के लिए युद्धविराम की खबरें भी आईं, जिससे उम्मीद जगी कि स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन हालात तब बदल गए, जब ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने का संकेत दिया।
यहीं से अमेरिका का रुख सख्त हो गया। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर किसी भी तरह का टोल स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया कि जो भी जहाज ईरान को भुगतान करेगा, उसे रोका जाए। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जैसे कदम उठाए गए, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
दूसरी ओर, Iran ने भी साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना हुआ है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। इस टकराव के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। अगर यह जलमार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका सीधा असर भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजरें इस छोटे से समुद्री रास्ते पर टिकी हुई हैं।
कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। यहां पैदा हुआ तनाव यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक टकराव कैसे पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस संकट को हल कर पाती है या फिर हालात और बिगड़ते हैं।



