थिम्पू। भूटान में सड़कों का जाल बिछाने, इंफ्रा डेवलपमेंट में भारत का अहम योगदान
थिम्पू। भूटान में सड़कों का जाल बिछाने और उसके बुनियादी ढांचे के विकास में भारत ने अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। भारत ने न केवल भूटान को शेष दुनिया से जोड़ने वाली पहली मोटर योग्य सड़क बनाई, बल्कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी को आधुनिक रूप देने का काम भी किया है। थिम्पू में भारत के सहयोग से ल्हाक्सम जंक्शन से ज़ैंगलेखा चिवोग तक जाने वाली सड़क का उद्घाटन किया गया, जो दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी का हालिया उदाहरण है।

भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा थिम्पू में भारत द्वारा समर्थित एक ‘हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ (एचआईसीडीपी) “ल्हाक्सम जंक्शन से ज़ैंगलेखा चिवोग तक फ़ार्म रोड” का उद्घाटन किया गया। ग्रामीण कनेक्टिविटी क्षेत्र का यह प्रोजेक्ट, गेन्येन गेवोग (ब्लॉक) के स्थानीय समुदाय के लिए पहुंच और आर्थिक अवसरों को बेहतर बनाएगा। विशेष रूप से यह स्थानीय कृषि उत्पादों की शहरी बाजारों तक पहुंच को सुगम बनाएगा।
भूटान में सड़क नेटवर्क के विकास में भारत के अतुल्य योगदान को इसी बात से समझा जा सकता है कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट दंतक ने हाल ही में भूटान की राजधानी थिम्फू में अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया। यह आयोजन भूटान में समर्पित सेवा के 65 वर्षों के मील के पत्थर का प्रतीक है। इस परियोजना की शुरुआत 24 अप्रैल 1961 को हुई थी और तब से लेकर अब तक भारत के सहयोग से पड़ोसी देश में 1,500 किमी से अधिक सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है, जिसमें थिम्फू को त्राशीगांग से जोड़ने वाला रणनीतिक पूर्व-पश्चिम राजमार्ग भी शामिल है।
अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात करें तो देश में पारो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और योंगफुला हवाई अड्डे के विकास में भारत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके अलावा पड़ोसी देश के प्रमुख शहरों एवं कस्बों से लेकर दूरदराज के गांवों तक अस्पताल, स्कूल, पुल, जलविद्युत बुनियादी ढांचे और दूरसंचार नेटवर्क जैसी राष्ट्रीय सुविधाओं के निर्माण में भी भारत का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है प्रोजेक्ट दंतक के स्थापना दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें थिम्पू में आयोजित एक अंतर-विद्यालय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, विशिष्ट कर्मियों का सम्मान और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वालों को भावभीनी श्रद्धांजलि शामिल है।
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इस प्रोजेक्ट ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जिसमें बड़े भूस्खलन और सड़कों का बह जाना शामिल है, रिकॉर्ड समय में कनेक्टिविटी बहाल करके असाधारण लचीलापन भी प्रदर्शित किया है। भारत का योगदान केवल सड़क निर्माण या बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का प्रतीक भी है। क्योंकि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत भूटान का ‘हर समय और हर क्षेत्र’ में हमेशा सहयोगी रहा है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



