नई दिल्ली (ब्यूरो)। रंगमंच, विचार और संवेदना का संगम, ‘ANWO थिएटर फेस्टिवल’ का सफल समापन
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित ‘पहला ANWO थिएटर फेस्टिवल’ 24 से 26 अप्रैल 2026 तक त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। Arts New Way Organisation (ANWO) द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव ने राजधानी के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए दर्शकों को विचार, संवेदना और सामाजिक यथार्थ से गहराई से जोड़ने का कार्य किया।

प्रतिदिन सायं 6:00 बजे से शुरू हुए इस नाट्य उत्सव में देशभर से आए प्रतिष्ठित रंगकर्मियों और नाट्य समूहों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव का संचालन कुलदीप वशिष्ठ, रिजवान रज़ा और गुरु डॉ. सपन आचार्य के मार्गदर्शन में किया गया।
इस नाट्य महोत्सव की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि इसमें कई कालजयी साहित्यिक कृतियों पर आधारित नाटकों का मंचन किया गया। सआदत हसन मंटो और निर्मल वर्मा जैसे प्रख्यात लेखकों की रचनाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि उन्हें गहन विचार और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित किया। विशेष रूप से ‘बांझ’ और ‘डेढ़ इंच ऊपर’ की प्रस्तुतियों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
महोत्सव के पहले दिन 24 अप्रैल को ‘ब्रह्मर्षि विश्वामित्र’ का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन गुरु डॉ. सपन आचार्य एवं बीना बंसल (सुमन) ने किया, जबकि लेखन एवं अभिनय निर्देशन कुलदीप वशिष्ठ द्वारा किया गया। इसके पश्चात ‘फटी हुई शादी की साड़ी’ ने अपने सामाजिक व्यंग्य और यथार्थपरक प्रस्तुति से दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।
दूसरे दिन 25 अप्रैल को ‘फायर प्लेस’ का मंचन हुआ, जिसमें समकालीन मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘फन्दी’ नाटक ने इच्छा-मृत्यु जैसे संवेदनशील विषय को गहनता से उठाकर दर्शकों को भावुक कर दिया और एक गंभीर विमर्श को जन्म दिया। महोत्सव के अंतिम दिन 26 अप्रैल को ‘बांझ’ का मंचन किया गया, जिसमें मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जटिलताओं को सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया गया। समापन प्रस्तुति ‘डेढ़ इंच ऊपर’ रही, जिसने अपने गूढ़ कथ्य और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम का समापन गुजराती लोक नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसकी नृत्यरचना बीना बंसल (सुमन) द्वारा की गई थी।
समापन अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. नेहरा तथा मध्य प्रदेश से विशेष रूप से आए वरिष्ठ कांग्रेस नेता, समाजसेवी, व्यवसायी एवं ‘पहल ऑर्गनाइजेशन’ के संस्थापक अध्यक्ष हरि कृष्ण द्विवेदी उपस्थित रहे। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया। साथ ही छऊ नृत्य शैली से जुड़े सभी कलाकारों और नर्तकों का भी इस आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा।
आर.सी. सुरेश और खुशबू राजपूत को उत्कृष्ट अभिनय के लिए सम्मान। महोत्सव के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कलाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ‘फन्दी’ में ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले आर.सी. सुरेश को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया, जबकि ‘ब्रह्मर्षि विश्वामित्र’ में मेनका की भूमिका को जीवंत करने वाली खुशबू राजपूत को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया। इसके अलावा इसी नाटक में नारद की भूमिका निभाने वाले चरित्र अभिनेता बृज नुक्ता को भी विशेष सम्मान से नवाजा गया। सभी कलाकारों को हरि कृष्ण द्विवेदी द्वारा पुरस्कृत किया गया।
इसके अतिरिक्त, महोत्सव में भाग लेने वाले सभी नाट्य समूहों के कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। वहीं, बीना बंसल (सुमन) की नृत्य-निर्देशन (कोरियोग्राफी) और उनके समूह को विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस तीन दिवसीय नाट्य समारोह की अभूतपूर्व सफलता में राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता रिज़वान रज़ा का अतुलनीय योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक संदेश देने वाले सफल आयोजन के लिए मातृभूमि सेवा संस्था की ओर से आयोजकों कुलदीप वशिष्ठ, रिज़वान रज़ा और गुरु डॉ. सपन आचार्य को मंच पर सम्मानित किया गया।
‘ANWO थिएटर फेस्टिवल’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के ज्वलंत मुद्दों, ऐतिहासिक संदर्भों और मानवीय मनोविज्ञान पर सार्थक संवाद स्थापित करने का एक सफल प्रयास साबित हुआ। यह महोत्सव न केवल रंगमंच प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि दिल्ली के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया।



