International Update: PoK में पाकिस्तान के खिलाफ फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे हजारों लोग; सुरक्षा बलों से हिंसक झड़प
महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज, JAAC के आह्वान पर हुआ बंद
International Update: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के कई शहरों में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं।
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा बुलाए गए बंद और लॉन्ग मार्च के बाद रावलकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली और पालंदरी समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़कों को जाम कर दिया और अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों में टकराव
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया। आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई स्थानों पर झड़पें हुईं। विभिन्न रिपोर्टों में कई लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में घायल होने की बात कही जा रही है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आखिर क्यों भड़का आंदोलन?
JAAC लंबे समय से क्षेत्र में महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, प्रशासनिक समस्याओं और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है। संगठन ने अपनी 38 सूत्रीय मांगों में बिजली और खाद्य सामग्री पर सब्सिडी, आर्थिक सुधार, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को शामिल किया है।
संगठन का आरोप है कि स्थानीय जनता की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं प्रशासन ने हाल ही में JAAC को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया, जिसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसी कदम ने जनता के आक्रोश को और बढ़ा दिया।
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इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक के आरोप
प्रदर्शनकारी नेताओं का दावा है कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं। उनका कहना है कि इससे लोगों के बीच संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है और क्षेत्र बाहरी दुनिया से लगभग कट गया है।
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल
PoK में बढ़ते तनाव को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदायों ने भी चिंता व्यक्त की है। ब्रिटेन सहित कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ विदेशी सांसदों और मानवाधिकार संगठनों ने भी हालात पर चिंता जताते हुए हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थानीय जनता की मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल PoK में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है।



