Bank Fraud India: 5 साल में ₹1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड, रिकवरी सिर्फ ₹6,389 करोड़; 7,173 FIR दर्ज
Bank Fraud India: देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पिछले 5 वित्तीय वर्षों में बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों में ₹1,42,112 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) दर्ज की गई। हालांकि इस अवधि में सिर्फ ₹6,389 करोड़ की ही रिकवरी हो सकी है। इसके अलावा इन मामलों में 7,173 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
राज्यसभा में क्या बताया सरकार ने?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।
इन आंकड़ों में शामिल हैं:
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs)
- निजी बैंक
- विदेशी बैंक
- स्मॉल फाइनेंस बैंक
- पेमेंट बैंक
- लोकल एरिया बैंक
- अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान (All India Financial Institutions)
बैंक फ्रॉड के प्रमुख आंकड़े
- कुल बैंक धोखाधड़ी: ₹1,42,112 करोड़
- रिकवरी: ₹6,389 करोड़
- दर्ज FIR: 7,173
- अवधि: पिछले 5 वित्तीय वर्ष
जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों पर क्या कार्रवाई हुई?
सरकार ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने:
- 15,577 विलफुल डिफॉल्टर्स (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले) के खिलाफ वसूली के लिए मुकदमे दायर किए।
- 10,894 मामलों में SARFAESI Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
- इन डिफॉल्टरों से कुल ₹52,360 करोड़ की वसूली की गई।
ध्यान दें: ₹52,360 करोड़ की यह वसूली विलफुल डिफॉल्टर मामलों से संबंधित है, जबकि ₹6,389 करोड़ की राशि बैंक फ्रॉड मामलों से हुई रिकवरी है। दोनों आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों के हैं।
RBI ने बैंकों को क्या निर्देश दिए हैं?
बढ़ते वित्तीय अपराधों और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार को देखते हुए RBI ने बैंकों को धोखाधड़ी रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने, संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई करने और ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में RBI ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन से जुड़े सुरक्षा ढांचे को भी और मजबूत करने की पहल की है।
क्यों अहम हैं ये आंकड़े?
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सामने आए फ्रॉड वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती हैं। हालांकि वसूली और कानूनी कार्रवाई जारी है, लेकिन कुल धोखाधड़ी की तुलना में रिकवरी अभी भी काफी कम है। ऐसे में बैंकिंग निगरानी, तकनीकी सुरक्षा और समय पर जांच की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।



