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Israel Election 2026 : इजरायल में नेतन्याहू की विदाई की तैयारी? आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन

Israel Election 2026 : इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर। अरब पार्टियों के समर्थन से गादी आइसेनकोट के पक्ष में 67 सांसदों का समर्थन जुटा। क्या खत्म होगा नेतन्याहू का शासन?

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Israel Election 2026 : इजरायल की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की राह मुश्किल हो गई है। नेतन्याहू के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और याशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइसेनकोट को अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा मिल गया है। इजरायल की अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट ने आइसेनकोट को समर्थन देने का फैसला किया है। इससे पहले राआम पार्टी भी उनके समर्थन की घोषणा कर चुकी है।

द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सीटों वाली जॉइंट लिस्ट राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने आइसेनकोट को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करने और सरकार बनाने का अवसर देने की सिफारिश करेगी। वहीं, आठ सीटों वाली राआम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास भी पहले ही उनके समर्थन की घोषणा कर चुके हैं।

67 सीटों के साथ बहुमत के पार पहुंचा गठबंधन

इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। जॉइंट लिस्ट की 11 और राआम पार्टी की आठ सीटें जोड़ने पर यह संख्या 67 पहुंच जाती है। इस तरह आइसेनकोट का समर्थन करने वाले दल बहुमत के आंकड़े से छह सीटें आगे निकल गए हैं।

इस घटनाक्रम ने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत पूरी होने के बाद आइसेनकोट को राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिलने की संभावना मजबूत हुई है।

नेतन्याहू को सत्ता से दूर रखने के लिए अरब दलों का फैसला

जॉइंट लिस्ट के तीनों घटकों ने नेतन्याहू और उनकी सरकार की सत्ता में वापसी रोकने के उद्देश्य से आइसेनकोट का समर्थन करने का फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि मजबूत समर्थन के साथ नई सरकार बनने से नेतन्याहू के किसी संभावित यूनिटी गवर्नमेंट के जरिए सत्ता में बने रहने की आशंका कम होगी।

हालांकि, अरब पार्टियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि आइसेनकोट और विपक्षी गठबंधन ने अब तक अरब नागरिकों के खिलाफ भड़काऊ बयानों का प्रभावी विरोध करने की पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। इसके बावजूद मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने के लिए आइसेनकोट का समर्थन जरूरी माना गया है।

हमास के निरस्त्रीकरण पर राआम ने दिया समर्थन

द जेरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार गठन को लेकर बातचीत के दौरान राआम प्रमुख मंसूर अब्बास ने हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण का समर्थन किया। यह आइसेनकोट की ओर से गठबंधन में शामिल होने के लिए रखी गई चार प्रमुख शर्तों में से एक है।

हमास को आतंकवादी संगठन मानने के सवाल पर अब्बास ने कहा कि अरब समाज और अरब नागरिकों को आतंकवाद का समर्थक या देशद्रोही बताकर अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अरब समाज और इजरायल के बीच संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

अब जॉइंट लिस्ट का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने आइसेनकोट के नाम की औपचारिक सिफारिश पेश करेगा। यदि राष्ट्रपति उन्हें सरकार बनाने का न्योता देते हैं और गठबंधन अपना समर्थन बनाए रखता है, तो इजरायल की राजनीति में नेतन्याहू के लंबे शासन का अंत हो सकता है।

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