Virat Kohli vs Sachin Tendulkar: सचिन से बेहतर विराट कोहली! एबी डिविलियर्स के बयान ने छेड़ी नई बहस, जानें किसके आंकड़े भारी

एबी डिविलियर्स ने टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से बेहतर बताया है। हालांकि, टेस्ट रिकॉर्ड और विदेशी क्रिकेट के आंकड़ों में सचिन का पलड़ा काफी मजबूत है।

Virat Kohli vs Sachin Tendulkar: विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर की तुलना भारतीय क्रिकेट में शायद ही कभी खत्म होने वाली बहस है। दोनों अपने-अपने दौर के महान बल्लेबाज रहे हैं और दोनों ने भारतीय क्रिकेट को दुनिया में अलग पहचान दिलाई। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स के एक बयान ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है। डिविलियर्स ने टेस्ट क्रिकेट में विराट कोहली को सचिन तेंदुलकर से बेहतर बताया है। हालांकि, जब दोनों के टेस्ट रिकॉर्ड पर नजर डालते हैं तो आंकड़े सचिन के पक्ष में काफी मजबूत दिखाई देते हैं।

दरअसल, भारत और श्रीलंका के बीच गॉल टेस्ट के बाद विराट और सचिन की तुलना एक बार फिर चर्चा में आई। इसी दौरान एबी डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर भारतीय बल्लेबाजों के विदेशी प्रदर्शन को लेकर बात की। उन्होंने सचिन तेंदुलकर की तारीफ करते हुए कहा कि वह उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में शामिल थे जिन्होंने दुनिया को यह दिखाया कि भारतीय बल्लेबाज विदेशी परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन डिविलियर्स के मुताबिक विराट कोहली ने इस विरासत को एक कदम आगे बढ़ाया।

डिविलियर्स की नजर में विराट की खासियत यह है कि उन्होंने तेज गेंदबाजों के लिए मददगार पिचों और उछाल वाली परिस्थितियों में भी लगातार खुद को साबित किया। विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, खासकर SENA देशों यानी दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में। डिविलियर्स को लगता है कि विराट ने इन परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को और मजबूत किया।

हालांकि अगर सिर्फ टेस्ट क्रिकेट के आंकड़ों की बात करें तो सचिन तेंदुलकर विराट कोहली से काफी आगे नजर आते हैं। सचिन ने अपने टेस्ट करियर में 200 मैच खेले और 15,921 रन बनाए। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक और 68 अर्धशतक दर्ज हैं। सचिन ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। दूसरी तरफ विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए और 2025 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। जाहिर है कि मैचों और कुल रनों के मामले में सचिन का रिकॉर्ड काफी बड़ा है।

विदेशी जमीन पर भी सचिन का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उनके टेस्ट करियर के 8,705 रन भारत के बाहर आए। यानी उनके कुल टेस्ट रनों का बड़ा हिस्सा विदेशी परिस्थितियों में बना। विराट कोहली ने भारत के बाहर 66 टेस्ट मैचों में 4,774 रन बनाए। दोनों के आंकड़ों को देखें तो सचिन का अनुभव और लंबे करियर का प्रभाव साफ दिखाई देता है।

SENA देशों में भी सचिन का पलड़ा भारी है। इन चार देशों में सचिन ने 63 टेस्ट मैच खेले और 5,387 रन बनाए। उनका बल्लेबाजी औसत 51.30 रहा। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए। विराट कोहली ने SENA देशों में 46 टेस्ट मैच खेले और 3,661 रन बनाए। उनका औसत 42.08 रहा। विराट ने इन देशों में 12 शतक और 14 अर्धशतक लगाए हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब आंकड़े सचिन के पक्ष में हैं तो आखिर एबी डिविलियर्स ने विराट कोहली को बेहतर क्यों बताया? इसका जवाब शायद दोनों खिलाड़ियों के प्रभाव और उनके खेलने के तरीके में छिपा है। डिविलियर्स की राय को आंकड़ों की सीधी तुलना के बजाय उनके क्रिकेटिंग प्रभाव के संदर्भ में देखा जा सकता है।

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सचिन ने उस दौर में भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जब विदेशी मैदानों पर भारतीय बल्लेबाजों से लगातार बड़ी पारियों की उम्मीद करना आसान नहीं था। उन्होंने अपनी तकनीक, धैर्य और शानदार बल्लेबाजी से दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया। वहीं विराट ने भारतीय क्रिकेट में एक अलग तरह की आक्रामक मानसिकता को मजबूत किया। उनकी बल्लेबाजी के साथ-साथ उनकी कप्तानी ने भी भारतीय टेस्ट टीम को विदेशी परिस्थितियों में मुकाबला करने का आत्मविश्वास दिया।

विराट की कप्तानी के दौरान भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत दर्ज की। विदेशों में भारतीय टीम के प्रदर्शन में आक्रामकता और फिटनेस पर भी खास जोर देखने को मिला। यही वजह है कि डिविलियर्स विराट को सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट की मानसिकता में बदलाव लाने वाले खिलाड़ी के रूप में देखते हैं।

हालांकि यह भी याद रखना जरूरी है कि ‘कौन बेहतर है’ इसका कोई एक अंतिम जवाब नहीं हो सकता। सचिन का करियर विराट से लंबा रहा और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 200 मैच खेलने का ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे तोड़ना बेहद मुश्किल माना जाता है। विराट ने भी अपने दौर में कई शानदार पारियां खेलीं और विदेशी परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई।

इसलिए डिविलियर्स का बयान व्यक्तिगत राय के तौर पर देखा जाना चाहिए। आंकड़ों के आधार पर सचिन कई मामलों में विराट से आगे हैं, जबकि डिविलियर्स विराट की बल्लेबाजी, विदेशी परिस्थितियों में उनके प्रभाव और भारतीय क्रिकेट की सोच बदलने में उनकी भूमिका को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि उनका यह बयान एक बार फिर क्रिकेट फैंस के बीच बहस का विषय बन गया है कि सचिन और विराट में आखिर टेस्ट क्रिकेट का असली बादशाह कौन है।

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