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Politics: सौरव-आशुतोष की रिहाई के लिए हाई कोर्ट पहुंची CJP, उद्धव ठाकरे को अभिजीत दीपके ने कहा धन्यवाद

Politics: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को दी चुनौती, उद्धव ठाकरे ने दशहरा रैली में उठाया था गिरफ्तारी का मुद्दा

Politics: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। पार्टी ने दोनों की हिरासत बढ़ाने के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की है। इस बीच, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को समर्थन देने के लिए धन्यवाद कहा है। ठाकरे ने अपनी दशहरा रैली में दोनों नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था।

दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए उद्धव ठाकरे का आभार जताया। इस मामले में राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई है। CJP का कहना है कि दोनों नेताओं की हिरासत जारी रखने का आदेश अनुचित है और उनकी रिहाई के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

उद्धव ठाकरे ने दशहरा रैली में उठाया मामला

उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को दशहरा रैली के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का जिक्र किया। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि हाथ में झंडा लेने पर लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने तिरंगे को लेकर सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए।

ठाकरे के बयान के बाद अभिजीत दीपके ने सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद किया। दीपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वह उद्धव ठाकरे के आभारी हैं।

इस मामले में CJP नेताओं को अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन भी मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक ने भी दोनों नेताओं के समर्थन में बयान दिए हैं।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुआ था प्रदर्शन

सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को CJP के अन्य सदस्यों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान उनके हाथों में तिरंगा था। पुलिस ने उन्हें उस स्थान पर प्रवेश करने और प्रदर्शन से जुड़े कथित उल्लंघनों के मामले में हिरासत में लिया।

रिपोर्टों के अनुसार, जंतर-मंतर के संबंधित हिस्से को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने के बावजूद वहां पहुंचने और बैरिकेड पार करने के आरोपों के बाद कार्रवाई की गई थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचा।

14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। CJP ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि हिरासत जारी रखने का पर्याप्त आधार नहीं था।

हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

CJP ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में दलील दी गई कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश कानूनी रूप से गलत है और दोनों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों पर असर डालता है।

दोनों नेताओं की ओर से यह भी कहा गया कि उन्होंने जमानतदार पेश किए थे, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। याचिका में हिरासत बढ़ाने के आधार और जमानतदारों को खारिज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दोनों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। उनके मुताबिक, राजनीतिक विवाद के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। ये याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलें हैं; मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

तत्काल सुनवाई की मांग, लेकिन प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी

CJP की कानूनी टीम ने मामले की तत्काल सुनवाई कराने की कोशिश की। रिपोर्टों के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में दशहरा अवकाश के दौरान रात में सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन उस दिन याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद 21 अक्टूबर को मामले को सूचीबद्ध कराने की कोशिश की गई।

इसलिए सुनवाई की स्थिति और अदालत की ओर से कोई नया आदेश जारी होने की जानकारी को ताजा आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में तत्काल सुनवाई की मांग और उसकी सूचीबद्धता को लेकर अलग-अलग विवरण हैं।

अभिजीत दीपके ने पहले भी दोनों नेताओं के समर्थन में लिखा था

अभिजीत दीपके ने इससे पहले भी सौरव दास और आशुतोष रांका के समर्थन में संदेश साझा किया था। 19 अक्टूबर को उन्होंने दोनों के जेल में रहने और अदालत में पेश होने के संदर्भ में भावुक प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने दोनों को आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया और उनकी हिम्मत की सराहना की।

दीपके की ताजा प्रतिक्रिया में उद्धव ठाकरे के समर्थन के लिए आभार जताया गया है। इस घटनाक्रम से साफ है कि CJP नेताओं की हिरासत का मामला अब केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी का भी विषय बन गया है।

अब अदालत के फैसले पर टिकी नजरें

सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर आगे की सुनवाई और अदालत के आदेश से मामले की दिशा स्पष्ट होगी। CJP दोनों नेताओं की रिहाई की मांग कर रही है, जबकि हिरासत बढ़ाने का आदेश मजिस्ट्रेट की ओर से पारित किया गया था।

उद्धव ठाकरे के बयान और अन्य राजनीतिक नेताओं के समर्थन ने इस मामले को व्यापक राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। हालांकि, हिरासत की वैधता, जमानतदारों को स्वीकार करने और प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और आधिकारिक आदेश से ही स्पष्ट होगी।

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