Bihar Tender Scam: बिहार टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 7 IAS अधिकारियों को समन; जांच तेज
Bihar Tender Scam: रिशु श्री और रिलायबल इन्फ्रा सर्विस से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल, हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच पर बढ़ा ध्यान
Bihar Tender Scam: बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच का दायरा बढ़ने की खबर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सात IAS अधिकारियों को समन जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। जांच एजेंसी कथित टेंडर सिंडिकेट में अधिकारियों की भूमिका, सरकारी ठेकों से जुड़ी गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
यह मामला ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री और उसकी कंपनी रिलायबल इन्फ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में अधिकारियों के साथ कथित सांठगांठ हुई। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच पर बढ़ा ध्यान
पटना हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को रिशु श्री की याचिका पर सुनवाई के दौरान ED और बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिशु श्री मुख्य साजिशकर्ता के बजाय एक मोहरे की तरह दिखाई देता है और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जरूरत हो सकती है।
अदालत ने कथित तौर पर यह सवाल भी उठाया कि ED की ओर से छह वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने रखे जाने के बावजूद सभी के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति क्या है। सुनवाई के दौरान जांच की निष्पक्षता और कुछ लोगों को बचाए जाने या कुछ को फंसाए जाने की आशंका से संबंधित सवाल भी उठे।
हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर ध्यान बढ़ा है। हालांकि, अदालत की टिप्पणी को आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
टेंडर की गोपनीय जानकारी चुनिंदा कंपनियों तक पहुंचाने का आरोप
जांच में आरोप है कि सरकारी विभागों के टेंडर से संबंधित गोपनीय तकनीकी जानकारी कुछ कंपनियों को पहले ही उपलब्ध करा दी जाती थी। इससे कथित तौर पर उन कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में फायदा मिलता था। यह भी आरोप है कि टेंडर की शर्तों को पसंदीदा कंपनियों के अनुकूल बनाने की कोशिश की गई।
यदि जांच में ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मामला सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। फिलहाल, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर की जानकारी किस स्तर पर साझा की गई और संबंधित अधिकारियों या कंपनियों की क्या भूमिका रही।
ED इससे पहले भी इस मामले में तलाशी अभियान चला चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 में पटना, मुजफ्फरपुर, सूरत और पानीपत के नौ ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। इस दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए जाने की जानकारी दी गई थी।
फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल
मामले में जांच एजेंसियां रिशु श्री के फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। इन रिकॉर्ड के माध्यम से अधिकारियों के साथ कथित बातचीत, टेंडर से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान और संभावित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझने की कोशिश की जा रही है।
सात IAS अधिकारियों को समन जारी किए जाने की खबर के बीच पूछताछ को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि टेंडर प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी और क्या किसी अधिकारी ने नियमों के विपरीत किसी कंपनी को लाभ पहुंचाया।
हालांकि, किसी व्यक्ति को समन जारी होना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच में सामने आने वाले तथ्य मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।
दो IAS अधिकारियों के निलंबन का भी उल्लेख
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार इस मामले में दो IAS अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है। इसके अलावा, SVU ने जून 2026 में रिशु श्री समेत सात आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
आरोपपत्र दाखिल होना जांच प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इससे आरोप अपने आप सिद्ध नहीं हो जाते। मामले में अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों पर निर्णय होगा।
ED की जांच में कथित मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय लेनदेन और अधिकारियों के साथ संभावित संबंधों की पड़ताल शामिल है। अब वरिष्ठ अधिकारियों को जारी समन से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
बिहार का यह मामला सरकारी खरीद और टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सामने लाता है। जांच एजेंसियां कथित अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं, जबकि हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि मामले में अन्य संभावित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की किस तरह जांच की जा रही है।
फिलहाल, ED और SVU की जांच, अधिकारियों से पूछताछ तथा अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। मामले में लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्थिति का आकलन करना जरूरी है।



