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Israel Election 2026: क्या सत्ता बचा पाएंगे नेतन्याहू? गादी आइजेनकॉट ने 7 अक्टूबर हमले की याद दिलाकर मांगे वोट

इस्राइल में आम चुनाव के लिए मतदान जारी है। गादी आइजेनकॉट ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले की जांच की मांग उठाई, जबकि नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी के लिए समर्थन मांगा।

Israel Election 2026: इस्राइल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने इस बार सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकॉट ने चुनाव प्रचार के दौरान 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले का मुद्दा उठाते हुए सरकार बदलने की अपील की है। उन्होंने सुरक्षा में हुई चूक की जवाबदेही तय करने के लिए स्वतंत्र जांच आयोग बनाने की मांग भी की है। चुनाव में सुरक्षा, सैन्य सेवा, सरकार की जवाबदेही और देश की राजनीतिक दिशा जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।

73 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे मतदान

इस्राइल में करीब 73.3 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं। देश की संसद नेसेट की 120 सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दल मैदान में हैं। मतदान के बाद किस दल को कितनी सीटें मिलती हैं, यह तय करेगा कि अगली सरकार बनाने की स्थिति में कौन होगा। हालांकि, इस्राइल की राजनीतिक व्यवस्था में केवल सबसे बड़ी पार्टी बनना ही प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने की गारंटी नहीं है। सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना भी जरूरी होता है।

नेतन्याहू ने खुद को बताया मजबूत नेता

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी लिकुड पार्टी के समर्थन में प्रचार करते हुए खुद को इस्राइल की सुरक्षा के लिए मजबूत नेतृत्व के तौर पर पेश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके सत्ता में आने की स्थिति में सरकार को अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

नेतन्याहू के लिए यह चुनाव कई मायनों में अहम है। उनके समर्थक उन्हें सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान देश का नेतृत्व करने वाला नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी सरकार पर सुरक्षा संबंधी विफलताओं की जिम्मेदारी से बचने और घरेलू राजनीतिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में चुनाव का नतीजा केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और शासन की दिशा से भी जुड़ा है।

आइजेनकॉट ने 7 अक्टूबर के हमले को बनाया मुद्दा

नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकॉट पूर्व सेना प्रमुख हैं और यशर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने मतदाताओं को 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले की याद दिलाते हुए कहा कि चुनाव देश को नई दिशा देने का अवसर है।

आइजेनकॉट और उनके समर्थकों ने सरकार बदलने तथा हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा संबंधी चूकों की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने की मांग उठाई है। विपक्ष का तर्क है कि इतनी गंभीर घटना की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और जांच राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए।

इस मुद्दे ने चुनावी मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। मतदाताओं के सामने एक तरफ नेतन्याहू का अनुभव और सुरक्षा संबंधी नेतृत्व का दावा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष जवाबदेही और राजनीतिक बदलाव की जरूरत पर जोर दे रहा है।

लिबरमैन और यायर गोलान ने भी उठाए सवाल

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी नेतन्याहू सरकार को घेरने की कोशिश की है। यिसराइल बेतेनु पार्टी के नेता एविगडोर लिबरमैन ने सरकार के खिलाफ मतदान को देश को मजबूत बनाने के समर्थन से जोड़कर पेश किया। उन्होंने अनिवार्य सैन्य या नागरिक सेवा, कानून के सामने समानता और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दे उठाए।

वहीं, डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने भी सरकार बदलने की अपील की। उन्होंने 7 अक्टूबर के हमले की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग के गठन का मुद्दा उठाया। सैन्य सेवा में समानता का सवाल भी इस चुनाव में अहम है, खासकर उन बहसों के बीच जिनमें कुछ अति-रूढ़िवादी समुदायों को सैन्य सेवा से मिली छूट पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

क्या अकेले बहुमत हासिल कर पाएंगे नेतन्याहू?

इस्राइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए आम तौर पर 61 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। देश में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू है, जिसके तहत मतदाता किसी एक उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक दलों की सूची को वोट देते हैं। इसके बाद सीटों का बंटवारा होता है और सरकार बनाने के लिए गठबंधन की कवायद शुरू होती है।

इस चुनाव में किसी एक खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में छोटे दलों और संभावित गठबंधन सहयोगियों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे ज्यादा सीटें हासिल कर भी लेती है, तो उन्हें सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना होगा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों को भी सत्ता परिवर्तन के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन एकजुट करना पड़ेगा।

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चुनाव के बाद कैसे बनेगी सरकार?

मतगणना और आधिकारिक परिणामों के बाद इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से परामर्श करेंगे। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने का अवसर देंगे, जिसके पास गठबंधन के जरिए बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी।

सरकार बनाने के लिए पहली बार चुने गए उम्मीदवार को 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति अधिकतम 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। यदि पहला उम्मीदवार सरकार बनाने में विफल रहता है, तो दूसरे सांसद को मौका दिया जा सकता है। आगे भी प्रयास असफल रहने पर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाता है और स्थिति के अनुसार नए चुनाव की नौबत भी आ सकती है। इस दौरान नई सरकार के कार्यभार संभालने तक मौजूदा सरकार कार्यवाहक भूमिका में बनी रह सकती है। फिलहाल इस्राइल के मतदाता अपना फैसला सुना रहे हैं। नतीजों से स्पष्ट होगा कि जनता नेतन्याहू के नेतृत्व पर एक बार फिर भरोसा जताती है या आइजेनकॉट और विपक्ष के बदलाव तथा जवाबदेही के संदेश को समर्थन मिलता है। लेकिन अंतिम तस्वीर केवल मतदान से नहीं, बल्कि संसद में बहुमत जुटाने की क्षमता से भी तय होगी।

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