International News: खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों पर शिकंजा, 22 हजार से ज्यादा नागरिकों को किया गया डिपोर्ट; सऊदी अरब ने सबसे ज्यादा निकाला

सऊदी अरब से 15,500 समेत खाड़ी देशों ने करीब 21,951 पाकिस्तानियों को भेजा वापस, भीख मांगने, अवैध प्रवास, ड्रग्स तस्करी और फर्जी दस्तावेज जैसे मामलों में हुई कार्रवाई

International News: पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच रिश्तों को लेकर भले ही इस्लामाबाद लगातार अपनी नजदीकी का दावा करता हो, लेकिन इन देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर हुई कार्रवाई ने नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, महज पांच महीनों के दौरान खाड़ी देशों ने करीब 21,951 पाकिस्तानी नागरिकों को वापस पाकिस्तान भेज दिया। इनमें सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब से डिपोर्ट किए गए लोगों की है।

खास बात यह है कि सऊदी अरब को पाकिस्तान का करीबी सहयोगी माना जाता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई अहम गतिविधियां देखने को मिली हैं। इसके बावजूद सऊदी अरब ने अपने यहां इमिग्रेशन और कानून से जुड़े मामलों में पाकिस्तानी नागरिकों पर सख्ती बरती है।

सऊदी अरब से सबसे ज्यादा पाकिस्तानी डिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने करीब 15,500 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से वापस भेजा। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया।

आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच खाड़ी देशों से पाकिस्तान लौटाए गए नागरिकों की कुल संख्या 21,951 रही। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जिन पर इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन, आपराधिक गतिविधियों या अन्य कानूनी मामलों से जुड़े आरोप थे।

भीख मांगने से लेकर ड्रग्स तस्करी तक के मामले

पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के पीछे कई तरह के कारण सामने आए हैं। इनमें वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से रहना, अवैध सीमा पार करना, ड्रग्स तस्करी, फर्जी दस्तावेज, सुरक्षा से जुड़े मामले और शरण नहीं मिलना जैसे कारण शामिल हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 472 पाकिस्तानी नागरिकों को भीख मांगने के आरोप में वापस भेजा गया। खाड़ी देशों में भीख मांगने को लेकर पहले भी पाकिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई होती रही है और कई बार संबंधित सरकारें अपने नागरिकों को विदेश जाने से पहले नियमों का पालन करने की हिदायत देती रही हैं।

हजारों भगोड़ों पर भी कार्रवाई

आंकड़ों के मुताबिक, कुल मामलों में 4,628 भगोड़ों को डिपोर्ट किया गया, जबकि 1,294 लोगों को जेल की सजा हुई और 968 पाकिस्तानियों को ब्लैकलिस्ट किया गया। वहीं 1,155 मामलों में पासपोर्ट खोने की जानकारी सामने आई।

भगोड़ों को वापस भेजने के मामले में भी सऊदी अरब सबसे आगे रहा। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने 3,921 पाकिस्तानी भगोड़ों को वापस भेजा, जबकि यूएई ने 636 भगोड़ों को पाकिस्तान डिपोर्ट किया।

इसके अलावा यूएई में इंटरपोल के सहयोग से नौ अपराधियों को पकड़े जाने के बाद पाकिस्तान भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है।

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दोस्ती अपनी जगह, कानून अपनी जगह

इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते चाहे कितने भी मजबूत क्यों न हों, वहां के कानूनों का उल्लंघन करने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेशों में काम करने वाले उसके लाखों नागरिक देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। प्रवासी पाकिस्तानियों से आने वाला पैसा विदेशी मुद्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में नागरिकों का डिपोर्ट होना पाकिस्तान के लिए रोजगार, प्रवासन और अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़े सवाल भी खड़े करता है।

हालांकि, किसी देश से डिपोर्ट किए जाने को केवल आर्थिक बदहाली से जोड़ना सही नहीं होगा। उपलब्ध आंकड़ों में अलग-अलग कानूनी, इमिग्रेशन और आपराधिक कारण शामिल हैं। इसलिए इन आंकड़ों का सबसे अहम संदेश यही है कि खाड़ी देशों ने नियमों के उल्लंघन को लेकर पाकिस्तानी नागरिकों पर कड़ा रुख अपनाया है।

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