LOP Rahul Gandhi: पैलेट से गई आंख की रोशनी, शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे, राहुल के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई एफआईआर
LoP Rahul Gandhi: Lost eyesight due to pellets, over 200 pellets in the body; FIR registered after Rahul's intervention.
LOP Rahul Gandhi:जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को संसद की ओर निकले प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट लगने से दाहिनी आंख की रोशनी गंवाने वाले छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद साहिल और उसके परिवार की ओर से लगातार की जा रही एफआईआर की मांग पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। साहिल ने शिकायत में घटना की जांच के साथ इलाज और मुआवजे की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
साहिल ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान उस पर पांच से छह बार धातु के पैलेट चलाए गए। उसके मुताबिक, वह जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुआ था। वहां से संसद की ओर मार्च के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के बीच भगदड़ मच गई। वह भीड़ के साथ पालिका-कनॉट प्लेस इलाके की ओर पहुंचा था। साहिल का दावा है कि इसी दौरान उसके दाहिने हिस्से में छाती, बाजू और आंख के पास कई पैलेट लगे। इसके बाद उसकी आंख, चेहरे, हाथ और छाती से खून निकलने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया।
शिकायत के मुताबिक, एम्स में हुए सीटी स्कैन में उसके शरीर में 200 से ज्यादा धातु के छर्रे पाए गए। ये छर्रे आंख, गर्दन, छाती, जबड़े और बाजू समेत शरीर के कई हिस्सों में बताए गए हैं। दाहिनी आंख के गड्ढे और उसके पीछे भी छर्रे मौजूद हैं। साहिल के मुताबिक, कुछ छर्रे नस के बेहद करीब होने के कारण निकाले नहीं जा सकते। उसका कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि आंख के भीतर मौजूद दो छर्रे लंबे समय तक, संभवतः जीवनभर रह सकते हैं। छाती में दिल के पास मौजूद छर्रों को लेकर भी डॉक्टरों ने लंबे इलाज की बात कही है।
साहिल के अनुसार, घटना के बाद उसे पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद सफदरजंग अस्पताल और फिर एम्स भेजा गया। एम्स के आरपीसी आई सेंटर और ट्रॉमा सेंटर में उसका इलाज हुआ। 22 जुलाई को आंख की पहली सर्जरी की गई। बाद में एक अगस्त को दूसरी सर्जरी हुई। शिकायत के मुताबिक, दोनों सर्जरी के बाद भी दाहिनी आंख की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने आंख की रोशनी वापस आने की संभावना बेहद कम बताई है। साहिल ने कहा है कि उसका इलाज लंबा चलेगा और शरीर में मौजूद छर्रों के कारण आगे भी उपचार की जरूरत पड़ेगी।
साहिल ने शिकायत में कहा है कि घटना के चार सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। उसने अब पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। साहिल ने जांच के लिए 20 जुलाई की घटनाओं से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का अनुरोध किया है। इसमें जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस के अंदर-बाहर के इलाके, पटेल चौक, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशनों और ट्रैफिक पुलिस के CCTV फुटेज शामिल हैं। उसने उस दिन की ड्रोन फुटेज को भी सुरक्षित कराने की मांग की है।
शिकायत में साहिल ने ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से निकाले गए धातु के छर्रों को पुलिस के कब्जे में लेकर उनकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही लेडी हार्डिंग अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, और एम्स से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड और एमएससी जांच में शामिल करने का अनुरोध किया है।
साहिल ने कहा है कि गंभीर चोट के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई है और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ा है। उसने लंबे इलाज को देखते हुए इलाज के खर्च और मुआवजे के लिए भी उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उसने पुलिस को बयान देने और जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि साहिल को चोट किस परिस्थिति में लगी, उस समय मौके पर किन सुरक्षा बलों की तैनाती थी, पैलेट चलाए गए थे या नहीं और अगर चलाए गए तो किस दिशा से और किस हथियार से। सीसीटीवी, वीडियो फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और बरामद धातु के छर्रों की फोरेंसिक जांच इस मामले में अहम साक्ष्य साबित हो सकती है। अब निगाह जांच पर है कि मेडिकल और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर पुलिस उस पूरे घटनाक्रम की कड़ी कैसे तैयार करती है।



