National News: होर्मुज संकट के बीच एक्शन में जयशंकर, नई दिल्ली में ईरानी विदेश मंत्री अराघची से होगी अहम वार्ता

ऊर्जा आपूर्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य और चाबहार पोर्ट समेत कई अहम मुद्दों पर भारत-ईरान के बीच होगी हाई लेवल बातचीत

National News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से नई दिल्ली में अहम द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया के हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

ऊर्जा और होर्मुज संकट रहेगा मुख्य एजेंडा

सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर और अराघची की बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे एलपीजी टैंकरों और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। भारत इस संकट को लेकर अपनी चिंताओं को सीधे ईरान के सामने रख सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ रहा है।

BRICS बैठक के लिए भारत पहुंचेगे अराघची

ईरानी विदेश मंत्री अराघची 14-15 मई को होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। हालांकि, उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विदेश मंत्री जयशंकर के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता को माना जा रहा है।

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और पश्चिम एशिया संकट को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।

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चाबहार पोर्ट पर भी होगी चर्चा

बैठक में Chabahar Port परियोजना पर भी चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर तब, जब भारत को चाबहार पोर्ट संचालन के लिए अमेरिका की ओर से मिली प्रतिबंधों में छूट की अवधि समाप्त हो चुकी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर ईरान और अमेरिका दोनों के संपर्क में बना हुआ है।

रूस के विदेश मंत्री से भी मुलाकात संभव

जानकारी के मुताबिक, जयशंकर की मुलाकात रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov से भी हो सकती है। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा और BRICS सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली वैश्विक तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

Written By: Anushri Yadav

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