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Resign: NEET से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक: जानिए कैसे CJP आंदोलन ने बदल दी पूरी सियासत | Full Timeline

Resign: NEET UG 2026 पेपर लीक का मामला शुरुआत में केवल परीक्षा की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा विवाद माना जा रहा था। लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल गया। जंतर-मंतर से लेकर संसद तक इसकी गूंज सुनाई दी, विपक्ष खुलकर मैदान में उतर आया, कई दौर की सरकारी बातचीत हुई और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मई 2026 में NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए। छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और दोबारा परीक्षा तथा जवाबदेही की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया।

CJP की एंट्री और आंदोलन का विस्तार

इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मुद्दे को संगठित छात्र आंदोलन का रूप दिया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार धरना शुरू हुआ। आंदोलन की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई थी।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल

आंदोलन को नई गति तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन आंदोलन जारी रहा। देशभर से छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इस आंदोलन का समर्थन किया।

संसद से सड़क तक बढ़ा दबाव

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने संसद में लगातार NEET पेपर लीक पर चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे सहित कई नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया। सरकार ने चर्चा की पेशकश की, लेकिन प्रदर्शनकारी केवल चर्चा नहीं बल्कि जवाबदेही की मांग पर अड़े रहे।

जंतर-मंतर पर टकराव

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़प हुई। पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। इस घटना ने पूरे आंदोलन को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।

सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत

बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने CJP प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू की। केंद्रीय मंत्रियों और आंदोलन के नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। हालांकि शुरुआती दौर में कोई सहमति नहीं बन सकी क्योंकि CJP लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को “नॉन-नेगोशिएबल” बताता रहा।

आखिरकार आया बड़ा राजनीतिक फैसला

लगातार बढ़ते जनदबाव, विपक्ष के हमलों और देशभर में जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया। इसे मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम और छात्र आंदोलन की महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है।

आगे क्या?

हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद आंदोलन के एक बड़े लक्ष्य की पूर्ति हो गई है, लेकिन CJP और छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। सरकार ने भी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सुधारों का संकेत दिया है।

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