New Delhi News: यूएन में भारत का तंजः पाक को तबाह एयरफील्ड, टूटे रनवे की ‘खोखली जीत’ मुबारक
New Delhi News: India's jibe at the UN – Congratulations to Pakistan on the 'hollow victory' of destroyed airfields and shattered runways.
New Delhi News:संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की छठी समिति (कानूनी मामले) में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब किया है। ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपाय’ विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रथम सचिव राघू पुरी ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा दिए गए भ्रामक बयानों का खंडन करते हुए भारत के ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ (जवाब देने का अधिकार) का इस्तेमाल किया।
न्यूयॉर्क स्थित यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने ‘एक्स’ पर भारतीय राजनयिक का बयान साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा असली सवाल तो यह है कि तब क्या होता है, जब किसी देश की ज़मीन से आतंकवादियों को पैसा, मदद, ट्रेनिंग, पनाह या सपोर्ट मिलता है? सिर्फ़ बयानों से आतंकवाद को नहीं हराया जा सकता। इसके लिए दोषियों, आयोजकों, पैसा देने वालों और स्पॉन्सर करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की ज़रूरत है।
पुरी ने कहा पाकिस्तान खुद को ‘फ्रंटलाइन स्टेट’ और पीड़ित बताता है, लेकिन इस बात को छिपाता है कि जिन ‘फ्रेंकस्टीन’ (खतरनाक ताकतों) को उसने बनाया और जिन पर से उसका कंट्रोल खत्म हो गया, वे अब पड़ोसी देशों में तबाही मचाने के बाद खुद पाकिस्तान में भी वही कर रहे हैं। पाकिस्तान के अपने नेताओं ने ही इस बात का खुलासा किया है। आप एक ही समय में दो विरोधी पक्षों का साथ नहीं दे सकते।
भारत ने स्पष्ट किया कि यूएन की लिस्ट में शामिल मसूद अज़हर (जेईएम चीफ और भारत पर हमलों का मास्टरमाइंड) के लिए ज़्यादा इनाम का ऐलान करना सिर्फ़ दिखावा है। आतंकवाद को पाकिस्तान की तरफ़ से मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में सब जानते हैं। कुछ महीने पहले ही, पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने जेईएम को “निष्क्रिय” बताया था। अगर मीडिया अज़हर तक पहुंच सकता है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उसकी पुष्टि ले सकता है, तो पाकिस्तानी सरकार को निश्चित रूप से पता होगा कि वह कहां है।
उन्होंने आगे कहा दुनिया 9/11 और बिन लादेन के मिलने की जगह को नहीं भूली है। न ही 26/11 को और न ही पहलगाम को। कई परिवारों को अभी भी न्याय का इंतज़ार है, जबकि दोषी आज़ाद घूम रहे हैं। पहलगाम के पीड़ितों से उनका धर्म पूछा गया था, न कि उनकी राजनीति। यह बहुत अजीब बात है कि पाकिस्तान धार्मिक नफ़रत से लड़ने की बात करता है, जबकि वह खुद सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है। पाकिस्तान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अपनी सेना के नैरेटिव को प्रचारित करने के लिए बेताब है और नैरेटिव बनाने, गलत जानकारी फैलाने और दुष्प्रचार करने में लगा हुआ है। अगर बर्बाद हो चुके एयरफील्ड और गड्ढों से भरे रनवे पाकिस्तान को जीत जैसे लगते हैं, तो वह खुशी-खुशी इसका आनंद ले सकता है।
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान के उन तमाम खोखले वादों की पोल तो खोली ही, जिनमें वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का अग्रिम मोर्चा (फ्रंटलाइन स्टेट) होने का दम भरता रहा है। साथ ही भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसे हुए भारी नुकसान को दुनिया के सामने रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि तबाही को जीत बताना बंद किया जाए।
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