कांग्रेस  नेताओं के अपशब्द क्या कांग्रेस  का खेल बिगाड़ सकते हैं ?

राहुल गांधी ने मंगलवार को राजस्थान के एक चुनावी रैली में कहा, ‘पनौती…पनौती…पनौती… हमारे लड़के विश्व कप जीतने की राह पर थे लेकिन पनौती ने उन्हें हरा दिया …इस देश के लोग जानते हैं।”  राजस्थान के भरतपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा था कि जेब कतरा कभी अकेला नहीं आता, तीन लोग होते हैं। एक सामने से आता है, एक पीछे से आता है और एक दूर से देखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम आपके ध्यान को इधर-उधर करने का है। वे सामने से टी।वी। में आते हैं और हिंदू-मुस्लिम, नोटबंदी, जी एस टी  कहते हैं। पीछे से अडानी आता है और आपका पैसा उठाकर ले जाता है। दूसरी तरफ से अमित शाह देखते हैं कि किसी को पता न लग जाए, दबाकर लाठी मारूंगा। 

मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी को झूठों का सरदार कह दिया। जयराम रमेश ने मोदी का मतलब ‘मास्टर ऑफ ड्रामा इन इंडिया’ बता दिया। अब तक कांग्रेस और भाजपा  के नेता राजस्थान में एक दूसरे पर तीखे हमले कर रहे थे, एक दूसरे की नीतियों की आलोचना कर रहे थे, अपनी अपनी गारंटी और वादे जनता के सामने रख रहे थे, मुद्दों पर आलोचना हो रही थी। किसी ने एक दूसरे पर पर्सनल अटैक नहीं किए थे लेकिन मंगलवार को राहुल गांधी ने इसकी भी शुरुआत कर दी।

राहुल ने जो कहा वो राजनीतिक नजरिए से, भाषा की मर्यादा की दृष्टि से, और चुनावी कैंपेन के गणित के लिहाज, हर तरह से गलत है। प्रधानमंत्री को पनौती कहना किसी लिहाज से ठीक नहीं है। इसे कोई उचित नहीं ठहरा सकता। कांग्रेस के सभी बड़े नेता आजकल चुनाव प्रचार के दौरान मोदी पर हमले करते हैं लेकिन शब्दों की मर्यादा का थोड़ा बहुत ध्यान रखते हैं । फिर राहुल गांधी ने ऐसा क्यों किया? इसको समझने की जरूरत है। असल में राहुल गांधी पिछले कई सालों से बार बार ये कहते हैं कि वो अकेले ऐसे नेता हैं, जो मोदी से नहीं डरते, वो मोदी के खिलाफ लड़ने वाले अकेले बहादुर नेता हैं, कांग्रेस के नेताओं के साथ मीटिंग में वो कई बार पार्टी के नेताओं को इस बात के लिए डांट चुके हैं कि वो मोदी पर सीधे हमले क्यों नहीं करते। गुलाम नबी आजाद जब कांग्रेस में थे तो उन्होंने ये बात कही भी थी। फिर G-23 के मेंबर्स ने कांग्रेस अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर राहुल गांधी की इसी तरह की बातों की शिकायत की थी लेकिन राहुल नहीं माने। राहुल उसके बाद मोदी पर लगातार इसीलिए पर्सनल अटैक करते हैं ताकि वह दिखा सकें कि वही अकेले ऐसे हिम्मत वाले नेता हैं जो मोदी के खिलाफ बिना डरे कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन इस चक्कर में राहुल सेल्फ गोल कर देते हैं।

राहुल के देखा देखी मंगलवार को मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश ने भी मोदी पर इसी तरह के सेल्फ गोल किये। खरगे ने मोदी को झूठों का सरदार कहा। मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस का मेनिफेस्टो जारी करने के लिए आए थे। मोदी अपनी रैलियों में खरगे के बयान का हवाला देकर कहते हैं कि कांग्रेस के बड़े बड़े नेता उनके स्वर्गीय पिता को भी गालियां दे रहे हैं। खऱगे ने इस पर सफाई देते हुए कहा उन्होंने अपनी मां और सभी भाई बहनों को सात साल की उम्र में खो दिया था, वह परिवारजनों को खोने का दुख समझते हैं। उन्होंने मोदी तो छोड़िए किसी के परिवार वालों के खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन मोदी बार बार झूठ बोलते हैं, क्योंकि वो झूठों के सरदार हैं। 

अभी तक कांग्रेस के नेताओं ने  पुराने अनुभवों  से कुछ नहीं सीखा है । कांग्रेस को पुराना   इतिहास याद रखना चाहिए । 2007 में गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान सोनिया गांधी ने मोदी को मौत का सौदागर कहा। कांग्रेस बुरी तरह हारी। 2014 में लोकसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने मोदी को खून का दलाल बताया। मणिशंकर अय्यर ने चाय बेचने वाला घटिया इंसान कहा। कांग्रेस बुरी तरह हारी। मोदी प्रधानमंत्री बन गए, पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। 2017 में कर्नाटक चुनाव के दौरान मणिशंकर ने मोदी को नीच कहा। फिर कांग्रेस हारी, भाजपा  की सरकार बनी। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक की रैली में राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया, फिर ये कहा कि ‘सारे चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है’। इस पर उन्हें गुजरात के कोर्ट में सजा भी हुई लेकिन कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में सफाया हो गया। मोदी पहले से ज्यादा बहुमत से जीते। 2022 में गुजरात चुनाव के समय खरगे ने मोदी को रावण बता दिया। कांग्रेस फिर हारी। इतने सारे उदाहरण होने के बाद भी कांग्रेस के नेता समझ नहीं रहे हैं कि जनता बाकी सब बर्दाश्त कर सकती है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों को लोग अच्छा नहीं मानते। राजस्थान में अब तक कांग्रेस का कैंपेन अच्छा भला चल रहा था। अशोक गहलोत खुद कमान संभाल हुए थे। प्रियंका गांधी की रैलियां हो रही थी। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई लेकिन राहुल गांधी पहुंचे, सारा गुड़गोबर कर दिया। अब कांग्रेस के स्थानीय नेता परेशान  हैं, कहीं राहुल गांधी का कैम्पेन  भाजपा   के लिए वरदान साबित न हो जाए।

देखा जाय तो  जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें भाजपा  को सबसे ज्यादा उम्मीद राजस्थान से है। यहां पिछले पांच साल से कांग्रेस की सरकार है, कांग्रेस में आपसी झगड़े हैं, चाहे पेपर लीक का आरोप हो या लाल डायरी का, ये आरोप कांग्रेस के नेताओं ने ही अशोक गहलोत पर लगाए हैं। इसीलिए ये भाजपा  के काम आ रहे हैं। दूसरी तरफ उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या और राजस्थान में हुए दंगे अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की रैलियों के लिए अच्छा खासा मसाला बन गए हैं। लगे हाथों योगी कानून और व्यवस्था की बात भी कह देते हैं। ये सारे मुद्दे ऐसे हैं जो जनता से सीधे जुड़े हुए हैं। हालांकि अशोक गहलोत ने अपनी गारंटियों के ज़रिए इनका जवाब देने की कोशिश की है। अशोक गहलोत का शुरू से ये प्रयास रहा है कि राजस्थान का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाए लेकिन राहुल गांधी ने मोदी पर सीधा हमला करके भाजपा  को बड़ा मौका दे दिया। जादूगर का प्लान फेल कर दिया।

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यही नहीं भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के जेबकतरे और पनौती वाले तंज के खिलाफ चुनाव आयोग का रुख किया। पोल पैनल को लिखे एक पत्र में, भाजपा  ने लिखा  कि प्रधानमंत्री की तुलना इस तरह से करना एक वरिष्ठ नेता के लिए सबसे अशोभनीय है और यह राजनीतिक चर्चा के गिरते स्तर का एक लक्षण है।भाजपा के पत्र में आगे  कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को इस तरह से कहना न केवल क्रूर दुर्व्यवहार और व्यक्तिगत हमला है, बल्कि उस व्यक्ति का चरित्र हनन भी है, जिसके खिलाफ उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और जनता को गुमराह करने के स्पष्ट इरादे से ऐसी टिप्पणी की गई है।

भाजपा  के राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन अग्रवाल ने कहा कि मैंने चुनाव आयोग से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनावी सभा में अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके खिलाफ हमने 25 तारीख से पहले उन दोनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हमारे प्रधानमंत्री ने हार के बावजूद सभी खिलाड़ियों की जो हौसला अफजाई की ये ऐतिहासिक है।चंद्रयान-1 की असफलता के बाद भी प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों की हौसला अफजाई की थी उसके बाद चंद्रयान की सफलता आप सबके सामने है। राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री  के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं लिहाज उनके खिलाफ जरूर कार्रवाई करनी चाहिए।  

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