Monsoon Session : मॉनसून सत्र से पहले बदले राजनीतिक समीकरण, क्या पास होंगे महिला आरक्षण और परिसीमन बिल?
Monsoon Session : मॉनसून सत्र से पहले महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लोकसभा और राज्यसभा में बदलते संख्या बल के बीच सरकार के लिए विशेष बहुमत जुटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Monsoon Session : संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार इन महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में संख्या बल का गणित एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। वर्तमान में लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। वहीं राज्यसभा में भी सरकार को आवश्यक संख्या जुटानी होगी, जो इस पूरे राजनीतिक समीकरण का सबसे अहम पहलू माना जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास करीब 293 सांसदों का समर्थन है। हालांकि हाल के महीनों में कई राज्यों की राजनीति में हुए बदलावों ने नए समीकरणों को जन्म दिया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरी असंतोष की खबरों ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दल या असंतुष्ट सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं तो संसद में सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत हो सकती है।
दूसरी तरफ दक्षिण भारत की राजनीति भी इस मुद्दे पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने परिसीमन के मौजूदा प्रस्तावों पर अपनी आपत्तियां बरकरार रखी हैं। पार्टी का तर्क है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व और हित प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सरकार के लिए दक्षिणी राज्यों के दलों का समर्थन हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा।
राज्यसभा में भी संख्या बल का गणित सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। हालिया राज्यसभा चुनावों के बाद एनडीए की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत तक पहुंचना अभी भी कठिन माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों का भविष्य केवल गठबंधन की ताकत पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि क्षेत्रीय दलों, निर्दलीय सांसदों और विपक्षी दलों के रुख पर भी टिका रहेगा। ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले होने वाली राजनीतिक बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और दलों के बदलते रुख पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
आगामी संसद सत्र में संख्या बल का यही गणित तय करेगा कि सरकार इन बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक विधेयकों को मंजूरी दिलाने में सफल हो पाती है या नहीं।



