Delhi News: UPI पर ‘पूनावाला ब्रदर्स’ की भिड़ंत, PM मोदी के वीडियो से छिड़ी नई बहस

झालमुड़ी वाले वीडियो पर उठे सवाल, शहजाद ने तस्वीर दिखाकर किया पलटवार

New Delhi: डिजिटल इंडिया और UPI को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है, लेकिन इस बार यह बहस दो विरोधी दलों के बीच नहीं, बल्कि एक ही परिवार के भीतर देखने को मिली। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और उनके भाई व राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर आमने-सामने आ गए।

यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ। दरअसल, पश्चिम बंगाल के झारग्राम दौरे के दौरान पीएम मोदी एक स्थानीय झालमुड़ी बेचने वाले दुकानदार के पास पहुंचे। उन्होंने दुकानदार से बातचीत की, झालमुड़ी खाई और जाते समय उसे 10 रुपये का नोट दिया। यह वीडियो खुद प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।

तहसीन का दावा—UPI नहीं था, इसलिए कैश देना पड़ा
वीडियो सामने आने के बाद तहसीन पूनावाला ने इसे लेकर सवाल उठाए। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने नकद भुगतान किया क्योंकि दुकानदार के पास UPI या कोई डिजिटल पेमेंट सिस्टम उपलब्ध नहीं था। उनके इस बयान को कुछ विपक्षी समर्थकों ने डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल उठाने के रूप में देखा।

तहसीन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार लगातार UPI को देश की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में उनका बयान सीधे-सीधे इस दावे पर सवाल उठाता नजर आया।

शहजाद का पलटवार—तस्वीर से दिया सबूत
तहसीन के इस दावे पर उनके भाई शहजाद पूनावाला ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उसी दुकानदार की एक तस्वीर साझा की, जिसमें दुकान पर लगा UPI क्यूआर कोड साफ दिखाई दे रहा था। इस तस्वीर के जरिए उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि दुकानदार के पास डिजिटल भुगतान की सुविधा मौजूद थी।

शहजाद ने अपने जवाब में लिखा कि 10 रुपये का नोट भुगतान के तौर पर नहीं, बल्कि एक “यादगार” के रूप में दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि UPI आज देश के हर कोने में पहुंच चुका है और इसे लेकर संदेह जताना अब वास्तविकता से दूर है।

New Delhi News-विदेश सचिव मिसरी ने अमेरिकी विदेश मंत्री और एफबीआई चीफ से की मुलाकात

UPI पर पुरानी बहस भी आई सामने
इस पूरे विवाद के दौरान शहजाद पूनावाला ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि गरीब तबका UPI का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। शहजाद ने इसे गलत साबित होने वाला अनुमान बताया और कहा कि आज छोटे दुकानदार से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले तक UPI का उपयोग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर बंटी राय
यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। कुछ लोग तहसीन के पक्ष में नजर आए और इसे “ग्राउंड रियलिटी” से जोड़कर देख रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने शहजाद के दावे को सही बताते हुए UPI की पहुंच का समर्थन किया।

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि भले ही दुकानदार के पास UPI मौजूद हो, लेकिन किसी खास मौके पर नकद भुगतान को “स्मृति” के तौर पर लेना भी एक सामान्य मानवीय व्यवहार है।

राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश
विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटना सिर्फ एक पेमेंट के तरीके की बहस नहीं है, बल्कि यह उस बड़े नैरेटिव का हिस्सा है जिसमें डिजिटल इंडिया, गरीबों तक तकनीक की पहुंच और सरकार की नीतियों की सफलता पर चर्चा होती है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 10 रुपये का नोट देना एक प्रतीकात्मक इशारा भी माना जा रहा है—जहां एक तरफ डिजिटल इंडिया का संदेश है, वहीं दूसरी तरफ व्यक्तिगत जुड़ाव और भावनात्मक कनेक्ट भी दिखता है।

Written By: Anushri Yadav

Related Articles

Back to top button